60 कुएं, ₹84,000 करोड़ का बजट; जानिए क्या है सरकार का 'समुद्र मंथन' प्लान ?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक ऐतिहासिक कदम: 'समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना'। सरकार ₹84,084 करोड़ के निवेश से विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने जा रही है।
भारत सरकार ने देश की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गहरे समुद्र में छिपे तेल के भंडारों की खोज के लिए 'समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना' (Samudra Manthan National Offshore Exploration Scheme) को मंजूरी दी है।
दुनिया में यह शायद पहली बार है जब कोई सरकार अपने बजट से सीधे तौर पर जोखिम भरे तेल अन्वेषण (Risk Exploration) के लिए इतनी बड़ी फंडिंग दे रही है।
योजना का पूरा प्लान क्या है?
इस मेगा प्लान का उद्देश्य भारत के विशाल और अब तक अछूते समुद्री जल भंडारों (Deepwater Reserves) का पता लगाना है।
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84,084 करोड़ रुपये का कुल बजट:
सरकार ने इस पूरी योजना के लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। -
60 गहरे कुओं की खुदाई:
इसके तहत अगले 5 वर्षों (साल 2031 तक) में गहरे (Deep-sea) और अत्यधिक गहरे (Ultra-deep water) समुद्र में कुल 60 कुएं खोदे जाएंगे। -
प्रति कुआं 650 करोड़ की मदद:
सरकार ने घोषणा की है कि कुएं की खुदाई में आने वाली लागत का आधा हिस्सा या अधिकतम 650 करोड़ रुपये (दोनों में से जो भी कम हो), वह खुद वहन करेगी। इन 60 कुओं की खुदाई के लिए 43,200 करोड़ रुपये का बजट अलग से रखा गया है। -
कॉमन हब इंफ्रास्ट्रक्चर (CHI):
सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की राशि साझा बुनियादी ढांचे (जैसे समुद्र के अंदर पाइपलाइन और ऑनशोर प्रोसेसिंग फैसिलिटी) के लिए रखी है। इसका फायदा यह होगा कि अलग-अलग कंपनियों को अपना अलग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाना पड़ेगा और उत्पादन की लागत कम आएगी।
सरकार खुद क्यों उठा रही है इतना बड़ा खर्च?
गहरे समुद्र में तेल खोजना एक बहुत ही महंगा और जोखिम भरा (High-Risk) काम है। इस योजना के पीछे सरकार के तीन मुख्य कारण हैं:
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निजी कंपनियों का जोखिम कम करना: अक्सर निजी कंपनियां ऐसे रिस्क वाले प्रोजेक्ट्स से बचती हैं क्योंकि अगर खुदाई के बाद तेल या गैस नहीं मिली, तो उनका पूरा निवेश डूब जाता है।
50% खर्च खुद उठाकर सरकार ग्लोबल एनर्जी कंपनियों को भारत में काम करने के लिए आकर्षित कर रही है। -
आयात पर निर्भरता खत्म करना:
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अगर भारत को अपने समुद्री इलाके में बड़े तेल भंडार मिल जाते हैं, तो हर साल विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी। -
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): दुनिया भर में, खासकर पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चैन बाधित होने का खतरा रहता है।
घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत वैश्विक संकटों के प्रभाव से खुद को सुरक्षित रख सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है, तो देश में हर साल 10 से 15 मिलियन टन तेल (Oil Equivalent) का अतिरिक्त उत्पादन जुड़ सकता है, जो भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।
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