पहले चीनी, फिर प्याज और अब दाल... आम आदमी का किचन बजट कब संभलेगा?

चीनी और प्याज के बाद अब दालों के दाम भी सातवें आसमान पर! अरहर और उड़द की कीमतों में भारी उछाल, देखें नई रेट लिस्ट।

पहले चीनी, फिर प्याज और अब दाल... आम आदमी का किचन बजट कब संभलेगा?

चीनी-प्याज के बाद अब दाल भी महंगी: अरहर और उड़द समेत प्रमुख दालों के दाम चढ़े, देखें नई रेट लिस्ट

खाने-पीने की जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घर का मासिक बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। टमाटर, प्याज और चीनी के दामों में आए उछाल के बाद अब खुदरा बाजार में दालों की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली अरहर (तुअर) और उड़द दाल के साथ-साथ मूंग और चने के भाव में भी तेजी दर्ज की जा रही है।

त्योहारी सीजन से ठीक पहले दालों के महंगे होने से मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है।

प्रमुख दालों के खुदरा भाव (औसत अनुमानित दरें)

देश के प्रमुख शहरों और खुदरा बाजारों में दालों की कीमतों में प्रति किलोग्राम 5 से 15 रुपये तक का इजाफा देखा गया है:

दाल का प्रकार पुराना औसत भाव (₹/किलो) नया खुदरा भाव (₹/किलो) बदलाव (अनुमानित)
अरहर / तुअर दाल ₹110 – ₹115 ₹125 – ₹140 + ₹15 से ₹25 तक की तेजी
उड़द दाल (धुली/काली) ₹110 – ₹115 ₹125 – ₹140 + ₹10 से ₹20 तक की तेजी
मूंग दाल ₹100 – ₹105 ₹115 – ₹125 + ₹10 से ₹15 तक की तेजी
चना दाल ₹75 – ₹80 ₹88 – ₹98 + ₹8 से ₹15 तक की तेजी
मसूर दाल ₹80 – ₹85 ₹90 – ₹100 + ₹5 से ₹10 तक की तेजी

(नोट: स्थानीय मंडियों, गुणवत्ता (प्रीमियम/स्टैंडर्ड) और परिवहन लागत के आधार पर अलग-अलग शहरों में दरें भिन्न हो सकती हैं।)

दालों के दाम बढ़ने के मुख्य कारण

  • बुवाई के रकबे में कमी: चालू खरीफ सीजन में दलहन फसलों की कुल बुवाई का रकबा पिछले वर्षों की तुलना में कम दर्ज किया गया है। विशेष रूप से अरहर और उड़द के उत्पादन क्षेत्रों में रकबा घटने से आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है।

  • मौसम और मानसून का प्रभाव: प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश) के कुछ हिस्सों में अनियमित बारिश और मौसमी बदलावों के कारण फसल की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है।

  • आयात में सुस्ती: म्यांमार और अफ्रीकी देशों से होने वाले दालों के आयात में समय-समय पर आने वाली लॉजिस्टिक्स रुकावटों और वैश्विक दरों के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई टाइट हुई है।

  • त्योहारी मांग: आगामी रक्षाबंधन, गणेशोत्सव और दिवाली जैसे त्योहारों के मद्देनजर थोक मंडियों और खुदरा व्यापारियों की तरफ से मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

आम जनता और गृहणियों पर असर

दाल भारतीय थाली में प्रोटीन का सबसे प्राथमिक और किफायती स्रोत है। खाद्य तेल, हरी सब्जियां, प्याज और चीनी के पहले से बढ़े दामों के बीच दालों के महंगा होने से आम परिवार का किचन बजट 15% से 20% तक बढ़ गया है। कई परिवारों को अपने मासिक राशन खर्च को संतुलित करने के लिए अन्य घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।

कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार के कदम

  • स्टॉक लिमिट और निगरानी: जमाखोरी और मुनाफाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा थोक विक्रेताओं और मिल मालिकों के दाल स्टॉक पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

  • सब्सिडी वाली दाल की बिक्री: सरकार 'भारत दाल' (Bharat Dal) ब्रांड के तहत रियायती दरों पर केंद्रीय भंडार, NAFED और NCCF आउटलेट्स के जरिए सस्ती चना दाल और अन्य दालें उपलब्ध करा रही है।

  • आयात शुल्क में रियायत: घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए पीली मटर और कुछ प्रमुख दालों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति को आगे बढ़ाया गया है।