मीराबाई चानू की गोल्डन हैट्रिक! कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को दिलाया पहला गोल्ड...

वेटलिफ्टिंग क्वीन मीराबाई चानू ने फिर रचा इतिहास! राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार 'गोल्डन हैट्रिक' लगाते हुए भारत को दिलाया पहला गोल्ड मेडल।

मीराबाई चानू की गोल्डन हैट्रिक! कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को दिलाया पहला गोल्ड...

मीराबाई चानू की 'गोल्डन हैट्रिक': कॉमनवेल्थ गेम्स में तिरंगा फहराकर भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

भारतीय खेलों के इतिहास में जब-जब स्वर्णिम अध्यायों की बात होगी, तब-तब मणिपुर की लाल स्टार साइखोम मीराबाई चानू का नाम गर्व से लिया जाएगा। अपनी अद्भुत ताकत, समर्पण और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे Commonwealth Games के मंच पर अजेय हैं। मीराबाई चानू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता और इसके साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी 'गोल्डन हैट्रिक' पूरी कर इतिहास रच दिया।

वेटलिफ्टिंग के 49 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए मीराबाई ने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि नया रिकॉर्ड कायम कर भारत को दुनिया के सामने गौरवान्वित होने का ऐतिहासिक पल भी दिया।

रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन से विरोधी चित

मीराबाई चानू का यह प्रदर्शन किसी सामान्य जीत जैसा नहीं था, बल्कि उन्होंने खेल के दौरान अपने निकटतम प्रतिस्पर्धी को बहुत बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया।

  • स्नैच (Snatch): मीराबाई ने स्नैच राउंड में ही अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी। उन्होंने पहले प्रयास में 84 किग्रा, दूसरे प्रयास में 88 किग्रा और तीसरे प्रयास में 88 किग्रा का भार उठाकर एक नया खेल रिकॉर्ड (CWG Record) स्थापित किया।

  • क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk): क्लीन एंड जर्क में मीराबाई की महारत जगजाहिर है। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 109 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक पूरी तरह से पक्का कर लिया था।

  • कुल वजन (Total Lift): कुल मिलाकर मीराबाई ने 197 किग्रा (88 किग्रा + 109 किग्रा) का भार उठाया, जो उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी से काफी आगे था।

प्रतिस्पर्धा में दूसरे स्थान पर रही मॉरीशस की रोइल्या रानाइवोसोटा ने कुल 172 किग्रा भार उठाकर रजत पदक जीता, जिससे मीराबाई का दबदबा साफ झलकता है।

राष्ट्रमंडल खेलों में मीराबाई की स्वर्णिम हैट्रिक

मीराबाई चानू की यह सफलता सिर्फ एक पदक की नहीं, बल्कि उनके द्वारा राष्ट्रमंडल खेलों में हासिल की गई शानदार निरंतरता की कहानी है:

  1. ग्लासगो CWG (2014): रजत पदक (48 किग्रा वर्ग) - यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की एक बड़ी शुरुआत थी।

  2. गोल्ड कोस्ट CWG (2018): पहला स्वर्ण पदक (48 किग्रा वर्ग) - यहाँ से उनकी बादशाहत शुरू हुई।

  3. बर्मिंघम CWG (2022): दूसरा स्वर्ण पदक (49 किग्रा वर्ग) - रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा।

  4. हैट्रिक का सफर: अपनी इस निरंतरता को जारी रखते हुए मीराबाई ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्वर्णिम हैट्रिक पूरी की और भारत की सबसे सफल एथलीटों में से एक बन गईं।

"जब भी मैं बारबेल उठाती हूँ, मेरे दिमाग में सिर्फ मेरा तिरंगा और देश की उम्मीदें होती हैं। भारत के लिए पहला गोल्ड जीतना मेरे लिए हमेशा से बेहद खास रहता है।"साइखोम मीराबाई चानू

संघर्ष से शिखर तक: लकड़ी के गट्ठों से विश्व विजेता बनने की कहानी

इम्फाल के पास नोंगपोक काकचिंग गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने वाली मीराबाई की राह कतई आसान नहीं थी।

  • बचपन का संघर्ष: 12 साल की उम्र से ही मीराबाई जंगलों से लकड़ी के भारी गट्ठे उठाकर घर लाया करती थीं। उनके परिवार ने देखा कि उनके बड़े भाई जितने वजन उठाने में हाँफने लगते थे, मीरा आसानी से उसे उठा लेती थीं।

  • ट्रक ड्राइवरों की मदद: शुरुआती ट्रेनिंग के समय प्रैक्टिस सेंटर उनके घर से लगभग 20-22 किलोमीटर दूर था। मीरा के पास बस का किराया देने के पैसे नहीं होते थे, इसलिए वे रोजाना सुबह रास्ते से गुजरने वाले बालू ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट लेकर ट्रेनिंग के लिए जाया करती थीं।

  • टोक्यो ओलंपिक का ऐतिहासिक पल: जब उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता, तो उन्होंने सबसे पहले उन ट्रक ड्राइवरों को सम्मानित कर अपना आभार जताया था।

देश भर में जश्न का माहौल: प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने दी बधाई

मीराबाई चानू की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर आम जनता से लेकर देश के दिग्गजों तक ने उन्हें इस शानदार सफलता पर बधाई दी।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई को बधाई देते हुए कहा: "असाधारण मीराबाई चानू ने एक बार फिर भारत को गौरवान्वित किया है! राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक जीतने पर उन्हें बधाई। उनका समर्पण और दृढ़ संकल्प हर भारतीय को प्रेरित करता है।"

  • राष्ट्रपति ने भी मीराबाई के शानदार प्रदर्शन की सराहना की और उन्हें देश की बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।

भारतीय खेलों के लिए क्या मायने रखती है यह जीत?

मीराबाई चानू की यह 'गोल्डन हैट्रिक' सिर्फ वेटलिफ्टिंग में मिली सफलता नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेल जगत में नारी शक्ति और ग्रामीण प्रतिभाओं के उभार का प्रतीक है। पूर्वोत्तर भारत से निकलकर विश्व स्तरीय एथलीट बनने का उनका यह सफर देश के युवाओं और युवा खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाता है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

भारत के लिए स्वर्ण पदकों का खाता खोलने वाली मीराबाई चानू की यह जीत आने वाले दिनों में देश के अन्य एथलीटों को भी पोडियम तक पहुँचने के लिए एक ऊर्जा और उत्साह प्रदान करेगी।