शराब घोटाला: सस्पेंस खत्म, केजरीवाल अब पूरी तरह आजाद !
दिल्ली की अदालत ने अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले के सभी आरोपों से बरी कर दिया है और सबूतों के अभाव में सीबीआई की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस फैसले ने केजरीवाल की बेगुनाही पर मुहर लगाते हुए दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है।
क्या शराब घोटाला हुआ ही नहीं? अरविंद केजरीवाल सभी आरोपों से बरी, कोर्ट ने CBI को फटकारा; जानें 6 बड़े सवालों के जवाब
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए आज का दिन 'न्याय की जीत' बनकर आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई (CBI) मामले में केजरीवाल को बाइज्जत बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—अगर घोटाला हुआ था, तो सबूत कहाँ हैं?
यहाँ 6 पॉइंट्स में समझिये इस पूरे फैसले का सार और इसके भविष्य पर पड़ने वाले असर:
1. क्या शराब घोटाला महज एक कल्पना थी?
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूत 'अपर्याप्त' और 'तथ्यों से परे' थे। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ऐसा कोई भी ठोस दस्तावेज या मनी ट्रेल (पैसों का लेन-देन) साबित नहीं कर पाई, जो सीधे तौर पर केजरीवाल को किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से जोड़ता हो।
2. कोर्ट ने CBI पर क्यों उठाए सवाल?
सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा कि "बिना किसी ठोस सबूत के एक सिटिंग सीएम को इतने समय तक हिरासत में क्यों रखा गया?" जज ने यहाँ तक कहा कि जांच एजेंसियां किसी के 'कथित बयान' (Approver's Statement) के आधार पर किसी को दोषी नहीं मान सकतीं, जब तक कि स्वतंत्र सबूत न हों।
3. 'सरकारी गवाहों' की विश्वस्तनीयता पर क्या कहा?
इस पूरे केस का आधार उन आरोपियों के बयान थे जो बाद में सरकारी गवाह (Approvers) बन गए थे। कोर्ट ने माना कि दबाव में दिए गए बयानों को एकमात्र सत्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की विफलता करार दिया कि वे गवाहों के बयानों को तकनीकी सबूतों से पुष्ट नहीं कर सके।
4. क्या अब अरविंद केजरीवाल दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे?
कानूनी तौर पर बरी होने के बाद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद पर लौटने की राह साफ हो गई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे आगामी चुनावों तक 'जनता की अदालत' में रहना पसंद करेंगे। लेकिन इस फैसले ने उन्हें नैतिक रूप से बहुत मजबूत कर दिया है।
5. आम आदमी पार्टी के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह फैसला 'AAP' के लिए संजीवनी की तरह है। पार्टी अब "विक्टिम कार्ड" और "ईमानदारी के सर्टिफिकेट" के साथ आगामी विधानसभा चुनावों में उतरेगी। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के बाद केजरीवाल का बरी होना पार्टी के इस नैरेटिव को सच साबित करता है कि यह "राजनीतिक प्रतिशोध" था।
6. अब आगे क्या? क्या CBI हाई कोर्ट जाएगी?
नियमों के मुताबिक, सीबीआई इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती है। लेकिन ट्रायल कोर्ट की इतनी सख्त टिप्पणियों के बाद ऊपरी अदालत में केस को टिकाए रखना एजेंसी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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