NEET Re-Exam के लिए अभेद्य सुरक्षा चक्र! 1.85 लाख AI कैमरे और 5 लाख जवानों का कड़ा पहरा।
5 लाख जवान, AI कैमरे और पैरामिलिट्री! NEET री-एग्जाम को 'लीक-प्रूफ' बनाने के लिए सरकार ने झोंकी पूरी ताकत। परीक्षा केंद्रों पर देश के बजट जैसी गोपनीयता।
5 लाख जवान, AI कैमरे और पैरामिलिट्री... NEET Re-Exam के लिए सरकार ने झोंकी पूरी ताकत
नीट (NEET UG) परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद के बाद सरकार इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। आगामी री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा चक्र तैयार किया है। देश के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा को कराने के लिए अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) से लेकर देश की सैन्य ताकतों तक की मदद ली जा रही है।
परीक्षा का 'महा-सुरक्षा चक्र' और तकनीक का पहरा
इस बार परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था किसी देशव्यापी चुनाव या बड़े राष्ट्रीय मिशन जैसी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सुप्रीम कोर्ट को भी इस नए और अभेद्य सुरक्षा ढांचे के बारे में सूचित किया है। सुरक्षा व्यवस्था को मुख्य रूप से चार कड़े स्तरों पर बांटा गया है:
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सेना और पैरामिलिट्री की निगरानी: प्रश्न पत्रों की प्रिंटिंग से लेकर उन्हें परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूम तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी CRPF, CISF, ITBP और जरूरत पड़ने पर वायुसेना (IAF) के लॉजिस्टिक्स को दी जा रही है।
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5 लाख से ज्यादा जवान: देश भर के हजारों परीक्षा केंद्रों पर कड़े पहरे के लिए सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय पुलिस बल के करीब 5 लाख जवानों को मुस्तैद किया जा रहा है।
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1.85 लाख AI कैमरे: हर परीक्षा हॉल, एंट्री गेट, कॉरिडोर और स्ट्रांग रूम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो सीधे केंद्रीय कमांड सेंटर से जुड़े होंगे। ये कैमरे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत अलर्ट भेजेंगे।
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बायोमेट्रिक और जैमर्स: फर्जी उम्मीदवारों (स्कॉलर्स) को रोकने के लिए आधार-आधारित फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन और लाइव फोटो कैप्चर की व्यवस्था की गई है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक चीटिंग रोकने के लिए सभी केंद्रों पर आधुनिक मोबाइल नेटवर्क जैमर्स एक्टिव रहेंगे।
बजट जैसी गोपनीयता: मोबाइल और इंटरनेट पर बैन
पेपर लीक की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए इस बार देश के 'केंद्रीय बजट' जैसा सख्त प्रोटोकॉल अपनाया जा रहा है।
कड़ी पाबंदी: प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर उसकी प्रिंटिंग होने तक, शामिल रहने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को एक पूरी तरह से इंसुलेटेड (गोपनीय) यूनिट में रखा गया है। परीक्षा संपन्न होने तक इन्हें स्मार्टफोन, इंटरनेट या किसी भी बाहरी संचार माध्यम का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।
सरकार की हाई-लेवल बैठकें और 'वार फुटिंग' पर तैयारी
आमतौर पर NEET जैसी बड़ी परीक्षा के आयोजन में करीब 6 महीने का वक्त लगता है, लेकिन सरकार इसे महज एक महीने के भीतर 'वार फुटिंग' (युद्ध स्तर) पर आयोजित कर रही है।
इस सुरक्षा खाके को अंतिम रूप देने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, एनटीए (NTA) के महानिदेशक और रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। असम और बिहार जैसे राज्यों में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में प्रश्न पत्र पहुंचाने के लिए सेना के विशेष विमानों और हेलीकॉप्टरों का बैकअप भी तैयार रखा गया है।
छात्रों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती
लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य और देश की साख से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार का पूरा जोर 'जीरो एरर' (Zero Error) यानी शून्य गलती की नीति पर है। सुरक्षा के इस त्रि-स्तरीय चक्र (जवान, पैरामिलिट्री और एआई तकनीक) के जरिए सरकार छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली के प्रति खोए हुए भरोसे को वापस बहाल करना चाहती है।
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