RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर स्थिर !

ना लोन सस्ता होगा, ना EMI घटेगी! RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने ग्लोबल टेंशन और उथल-पुथल को बताया महंगाई का मुख्य कारण। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) वालों के लिए अच्छे दिन जारी रहेंगे।

RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर स्थिर !

लोन सस्ते नहीं, EMI भी नहीं घटेगी: ब्याज दर 5.25% पर बरकरार !

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सस्ती ईएमआई (EMI) की उम्मीद लगाए बैठे आम लोगों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी समीक्षा बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। प्रमुख ब्याज दर 5.25% पर बरकरार रखी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते नहीं होंगे और आपकी मौजूदा ईएमआई भी नहीं घटेगी।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि वैश्विक परिस्थितियों और महंगाई के दबाव को देखते हुए दरों को स्थिर रखने का यह कदम उठाया गया है।

फैसले की बड़ी बातें:

  • रेपो रेट में बदलाव नहीं: प्रमुख ब्याज दर 5.25% पर स्थिर रखी गई है।

  • EMI में राहत नहीं: फ्लोटिंग रेट वाले पुराने लोन और नए लोन की दरों में कोई कटौती नहीं होगी।

  • महंगाई पर फोकस: आरबीआई की प्राथमिकता अब भी विकास दर को बनाए रखते हुए महंगाई को काबू में रखने पर है।

दुनिया में उथल-पुथल का असर

आरबीआई गवर्नर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि दुनिया भर में चल रही भू-राजनीतिक (Geopolitical) उथल-पुथल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ रहा है। ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के कारण महंगाई को तय लक्ष्य पर बनाए रखना एक चुनौती है।

उन्होंने कहा, "दुनिया में जो अनिश्चितता और तनाव का माहौल है, उसके कारण महंगाई बढ़ी है। इन बाहरी झटकों (External Shocks) से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए हमें घरेलू स्तर पर सतर्क रहने और दरों को स्थिर रखने की जरूरत है।"

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। इसके स्थिर रहने का आम आदमी के बजट पर सीधा असर पड़ता है:

  1. फ्लोटिंग रेट वाले लोन: जिन ग्राहकों का होम लोन या एजुकेशन लोन फ्लोटिंग रेट पर चल रहा है, उनकी EMI में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्हें मौजूदा दर से ही किश्त चुकानी होगी।

  2. नए कर्जदारों को इंतजार: जो लोग नया घर या गाड़ी खरीदने के लिए सस्ते लोन का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अभी मौजूदा ब्याज दरों पर ही लोन लेना होगा।

  3. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए: लोन सस्ता न होने का दूसरा पहलू यह है कि बैंकों में FD कराने वालों को भी मौजूदा उच्च ब्याज दरों का फायदा मिलता रहेगा। बैंक फिलहाल जमा दरों में कोई बड़ी कटौती नहीं करेंगे।

आगे क्या?

आरबीआई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) उनके तय लक्ष्य (4%) के भीतर पूरी तरह से स्थिर नहीं हो जाती, तब तक ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) की संभावना कम है। केंद्रीय बैंक की नजर आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी बनी रहेगी।