स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर रहस्यमयी तरीके से 1600 करोड़ का अमेरिकी ड्रोन हुआ लापता !
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर उड़ान भरते समय अमेरिकी नौसेना का ₹1600 करोड़ का आधुनिक MQ-4C ट्राइटन ड्रोन रहस्यमयी तरीके से रडार से गायब हो गया है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है, जहाँ तकनीकी खराबी और विदेशी 'इलेक्ट्रॉनिक हमले' की साजिश की आशंका जताई जा रही है।
बीच हवा में 1600 करोड़ का अमेरिकी ड्रोन गायब! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर रहस्यमयी तरीके से हुआ लापता
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) की नींद उड़ा दी है। दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे निगरानी ड्रोन्स में से एक, अमेरिकी नौसेना का MQ-4C ट्राइटन (Triton), स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के ऊपर उड़ान भरते समय रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ड्रोन की कीमत लगभग 1600 करोड़ रुपये ($200 मिलियन) से अधिक बताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (Electronic Warfare) की चर्चा छेड़ दी है।
कैसे हुआ यह 'गायब'?
ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा (जैसे Flightradar24) के अनुसार, यह ड्रोन खाड़ी क्षेत्र में नियमित निगरानी मिशन पर था।
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इमरजेंसी सिग्नल: लापता होने से ठीक पहले ड्रोन ने 7700 (General Emergency) और 7400 (Loss of Communication) का कोड भेजा था।
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ऊंचाई से गिरना: डेटा दिखाता है कि ड्रोन अचानक 52,000 फीट की ऊंचाई से गोता लगाते हुए 12,000 फीट तक नीचे आया और फिर रडार से पूरी तरह गायब हो गया।
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लोकेशन: यह घटना बहरीन के उत्तर में और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के करीब अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में हुई।
MQ-4C ट्राइटन: क्यों है यह इतना खास?
यह कोई साधारण ड्रोन नहीं है। यह अमेरिकी नौसेना की 'आंख' माना जाता है।
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निगरानी क्षमता: यह एक बार में 24 घंटे से ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है और एक ही मिशन में लाखों वर्ग मील के समुद्री क्षेत्र को स्कैन कर सकता है।
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लागत: इसकी भारी-भरकम कीमत इसे दुनिया के सबसे महंगे मानव रहित विमानों (UAV) की सूची में डालती है।
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तकनीक: इसमें समुद्री सतह पर जहाजों और पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए उन्नत सेंसर और रडार लगे होते हैं।
साजिश या तकनीकी खराबी?
पेंटागन ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों के बीच अटकलें तेज हैं:
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इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग: क्या ईरान ने रूसी या चीनी तकनीक का इस्तेमाल कर ड्रोन के सिग्नल जाम कर दिए? 2011 में भी ईरान ने इसी तरह अमेरिका के RQ-170 सेंटिनल ड्रोन को 'हाईजैक' कर सुरक्षित उतार लिया था।
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जीपीएस स्पूफिंग: विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन के नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर उसे दुर्घटनाग्रस्त किया जा सकता है।
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तकनीकी विफलता: अत्यधिक ऊंचाई पर अचानक इंजन या कम्युनिकेशन लिंक फेल होना भी एक वजह हो सकती है।
रणनीतिक संकट (Strait of Hormuz)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (Oil Bottleneck) है। दुनिया का लगभग 20% तेल यहीं से होकर गुजरता है। इस इलाके में अमेरिका के सबसे आधुनिक ड्रोन का लापता होना न केवल एक वित्तीय नुकसान है, बल्कि यह क्षेत्र में अमेरिकी खुफिया नेटवर्क (Intelligence) के लिए भी एक बड़ा झटका है।
आगे क्या?
यदि यह साबित होता है कि ड्रोन को किसी बाहरी हस्तक्षेप (जैसे मिसाइल या जैमिंग) से गिराया गया है, तो ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच सकता है। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना मलबे की तलाश और डेटा विश्लेषण में जुटी है ताकि इस रहस्यमयी 'गायब' होने की असली वजह का पता लगाया जा सके।
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