आज की सबसे बड़ी खबर: ईरान-इजरायल युद्ध और भारत का मास्टरस्ट्रोक!
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत पर इसका क्या असर होगा?
पश्चिम एशिया की धरती आज बारूद के ढेर पर बैठी है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ा यह संघर्ष अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी तपिश अब भारतीय रसोई से लेकर दलाली स्ट्रीट (Stock Market) तक महसूस की जा रही है।
मुख्य सुर्ख़ियाँ:
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होर्मुज की जलसंधि (Strait of Hormuz) पर पहरा: भारत की 20% तेल सप्लाई खतरे में, कच्चे तेल की कीमतें $110 के पार।
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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की भारी कटौती।
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अर्थव्यवस्था पर ब्रेक: मार्च के आंकड़ों के अनुसार भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 4.5 साल के निचले स्तर पर।
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रूस बना सहारा: खाड़ी में तनाव के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचाया।
दशकों बाद दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ युद्ध की आग सीधे आपकी जेब पर वार कर रही है। ईरान द्वारा 'होर्मुज की जलसंधि' को आंशिक रूप से बंद किए जाने के बाद, भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से आधा हिस्सा इसी अशांत क्षेत्र से आता है।
हालाँकि, केंद्र सरकार इस संकट से निपटने के लिए 'प्लान-B' पर काम कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज सुबह ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का एलान किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे आम आदमी पर न पड़े।
लेकिन चिंता केवल तेल की नहीं है। सप्लाई चेन टूटने से खाद (Fertilizers) और रसायनों की कमी होने लगी है, जिसका असर हमारे किसानों और आने वाली फसलों पर पड़ सकता है। शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले दबाव में दिख रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का रुख: पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत 'संवाद और कूटनीति' (Dialogue and Diplomacy) का पक्षधर है। भारत लगातार ईरान और अमेरिका दोनों के संपर्क में है ताकि इस युद्ध को और फैलने से रोका जा सके। साथ ही, खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर भी विदेश मंत्रालय हाई अलर्ट पर है।
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