अब मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलेगा कोई भी 'सिरप'; नियम बदला !

अब खांसी की दवा सीधे मेडिकल स्टोर से नहीं मिलेगी! स्वास्थ्य मंत्रालय ने कफ सिरप के बढ़ते साइड-इफेक्ट्स और गलत इस्तेमाल को देखते हुए डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य कर दिया है।

अब मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलेगा कोई भी 'सिरप'; नियम बदला !

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में दवाओं की बिक्री और मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब आप मेडिकल स्टोर पर जाकर सीधे किसी भी प्रकार की पीने वाली दवा यानी 'सिरप' (खासकर कफ सिरप) नहीं खरीद सकेंगे। सरकार ने नए नियमों के तहत अब सभी तरह के सिरप बेचने के लिए डॉक्टर का पर्चा (Prescription) अनिवार्य कर दिया है।

ड्रग्स रूल्स में बड़ा बदलाव: क्या बदला है?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स (Drugs Rules), 1945 में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना (Notification) जारी की है:

  • शेड्यूल K (Schedule K) से बाहर हुआ 'सिरप': अब तक कफ सिरप, लोजेंज (चूसने वाली गोलियां) और खांसी की कुछ दवाएं 'शेड्यूल के' के तहत आती थीं। इस शेड्यूल में शामिल घरेलू उपचार वाली दवाओं को मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर के पर्चे के (Over-The-Counter या OTC) खरीदा जा सकता था।

  • अब डॉक्टर का पर्चा जरूरी: सरकार ने इस सूची से 'सिरप' (Syrup) शब्द को पूरी तरह हटा दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब बिना डॉक्टर की लिखित मर्जी या पर्चे के केमिस्ट आपको कोई भी कफ सिरप या लिक्विड दवा नहीं दे पाएगा।

  • गोलियों पर छूट जारी: खांसी के लिए इस्तेमाल होने वाले लोजेंज (Lozenges), गोलियां (Tablets) और पिल्स अभी भी बिना पर्चे के मेडिकल स्टोर से खरीदे जा सकेंगे।

सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?

पिछले कुछ समय में देश और दुनिया में कफ सिरप की गुणवत्ता और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर मामले सामने आए हैं, जिसके बाद ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सलाह पर यह कदम उठाया गया:

1. दूषित सिरप और बच्चों की मौत का मामला

हाल के वर्षों में भारत के कुछ राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश) और विदेशों (जैसे गाम्बिया और उज्बेकिस्तान) में कथित तौर पर दूषित कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत की दुखद खबरें सामने आईं। जांच में पाया गया कि कुछ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा तय सीमा से बहुत ज्यादा थी।

2. खुद से दवा लेने (Self-Medication) का खतरा

लोग अक्सर बिना डॉक्टर से पूछे खुद ही मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीदकर बच्चों या बड़ों को दे देते हैं। कई सिरप में 'डेक्सट्रोमेथॉर्फन' जैसी सामग्री होती है, जो 4 से 6 साल से कम उम्र के बच्चों के श्वसन तंत्र (Respiratory System) के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है और इससे जान जाने का जोखिम भी रहता है।

3. नशे के रूप में गलत इस्तेमाल

कई कफ सिरप में कोडीन (Codeine) जैसे ओपिओइड्स (नशीले तत्व) होते हैं। बिना किसी रोक-टोक के मिलने के कारण कई लोग इन सिरप का इस्तेमाल खांसी ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि नशे के लिए करने लगे थे। अब पर्चा अनिवार्य होने से इस अवैध लत और तस्करी पर लगाम लगेगी।

आम जनता और मेडिकल स्टोर्स पर क्या असर पड़ेगा?

  • मरीजों के लिए: अब अगर आपको या घर में किसी को खांसी-जुकाम है, तो सीधे मेडिकल स्टोर जाने के बजाय पहले डॉक्टर को दिखाना होगा। डॉक्टर जो सिरप लिखकर देंगे, केवल वही केमिस्ट आपको बेचेगा।

  • मेडिकल स्टोर्स के लिए: केमिस्ट्स को अब इन दवाओं की बिक्री का सख्त रिकॉर्ड रखना होगा। बिना पर्चे के सिरप बेचने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है और लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।

हालांकि इस नियम से आम जनता को शुरुआत में थोड़ी परेशानी हो सकती है कि उन्हें एक सिरप के लिए भी डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा, लेकिन बच्चों की सुरक्षा, नकली दवाओं पर रोक और कफ सिरप के जानलेवा साइड-इफेक्ट्स से बचाने के लिए यह फैसला देश के हेल्थ सेक्टर में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।