भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने 450 किमी ऊपर अंतरिक्ष में तिरंगा लहराया !

आसमान छोटा पड़ गया! भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च। अंतरिक्ष की रेस में भारत की एक और ऊंची छलांग।

भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने 450 किमी ऊपर अंतरिक्ष में तिरंगा लहराया !

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: 450 किमी ऊपर कक्षा में पहुंचा; पीएम मोदी ने फोन पर बधाई दी

भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। देश का पहला निजी तौर पर विकसित 'ऑर्बिटल-क्लास' रॉकेट 'विक्रम-1' (Vikram-1) शनिवार (18 जुलाई 2026) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से सुबह 12:05 बजे इस रॉकेट ने उड़ान भरी। यह मिशन अपने पहले ही प्रयास में पूरी तरह कामयाब रहा, और रॉकेट ने करीब 450 किलोमीटर ऊपर पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit - LEO) में पेलोड को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

इस ऐतिहासिक मिशन को 'मिशन आगमन' (Mission Aagaman) नाम दिया गया था। इस सफलता के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जिनके पास निजी तौर पर कक्षा में उपग्रह भेजने की क्षमता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़ी उपलब्धि पर हैदराबाद स्थित स्टार्टअप 'स्काईरूट एयरोस्पेस' (Skyroot Aerospace) के फाउंडर पवन कुमार चंदना को फोन कर बधाई दी और इसे देश के स्पेस सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक नई शुरुआत बताया।

काउंटडाउन के दौरान बढ़ी धड़कनें

शनिवार सुबह इस लॉन्चिंग को लेकर भारी उत्साह था। पहले यह लॉन्च सुबह 11:30 बजे निर्धारित था। लेकिन तकनीकी बारीकियों को देखते हुए लॉन्च से ठीक 5 मिनट पहले काउंटडाउन को रोक दिया गया (Hold किया गया)। कुछ ही मिनटों की जांच के बाद जब सब कुछ सामान्य पाया गया, तो काउंटडाउन दोबारा शुरू हुआ और दोपहर 12:05 बजे रॉकेट ने आसमान की ओर गर्जना भरी। रॉकेट ने निर्धारित समय के भीतर अपने सभी चरणों (Stages) को पूरा किया और उपग्रह को सटीक कक्षा में पहुंचा दिया।

विक्रम-1 रॉकेट की 5 बड़ी खूबियां

रॉकेट विक्रम-1 को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में नाम दिया गया है। यह कई मायनों में बेहद खास और अत्याधुनिक है:

  • कार्बन-फाइबर बॉडी: यह रॉकेट पूरी तरह से कार्बन-कंपोजिट (Carbon-Fibre based) ढांचे पर बनाया गया है, जो इसे बेहद हल्का और अविश्वसनीय रूप से मजबूत बनाता है।

  • 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन: इस रॉकेट में आधुनिक सॉलिड फ्यूल बूस्टर्स के साथ-साथ अत्याधुनिक 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

  • पेलोड क्षमता: विक्रम-1 पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में करीब 350 किलोग्राम तक के पेलोड/सैटेलाइट ले जाने में सक्षम है।

  • मल्टी-सैटेलाइट इंसर्शन: यह रॉकेट एक साथ कई छोटे उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता रखता है।

  • त्वरित असेंबली: स्काईरूट के मुताबिक, इस रॉकेट को मात्र 24 घंटे के भीतर किसी भी लॉन्च साइट से असेंबल और लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है।

सब-ऑर्बिटल और ऑर्बिटल रॉकेट में क्या अंतर है?

स्काईरूट एयरोस्पेस ने इससे पहले नवंबर 2022 में 'विक्रम-एस' (Vikram-S) रॉकेट लॉन्च किया था। लेकिन वह एक सब-ऑर्बिटल (Sub-orbital) मिशन था, जो केवल 89.5 किमी की ऊंचाई तक जाकर समुद्र में गिर गया था। उसका मकसद सिर्फ तकनीक की टेस्टिंग करना था, सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ना नहीं।

इसके विपरीत, 'विक्रम-1' एक ऑर्बिटल (Orbital) क्लास रॉकेट है ऑर्बिटल रॉकेट अंतरिक्ष में पेलोड को इतनी तेज गति और सटीक कोण प्रदान करता है कि उपग्रह गुरुत्वाकर्षण को संतुलित करते हुए पृथ्वी की कक्षा में लगातार चक्कर लगाने लगते हैं।

भारतीय स्पेस सेक्टर के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक दिन?

साल 2020 में केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़े सुधारों को मंजूरी दी थी, जिसके तहत निजी कंपनियों के लिए भारतीय अंतरिक्ष के दरवाजे खोले गए। इसरो (ISRO) और इन-स्पेस (IN-SPACe) के सहयोग से निजी कंपनियों को बुनियादी ढांचा और लॉन्चपैड प्रदान किए जा रहे हैं।

भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के लिए गेम चेंजर:

"विक्रम-1 का यह सफल प्रक्षेपण तीन विकासात्मक (Developmental) उड़ानों में से पहला है। इसके बाद कंपनी नियमित रूप से कमर्शियल लॉन्च सेवाएं शुरू करेगी। इससे भारत वैश्विक स्तर पर छोटे उपग्रहों (Small Satellites) के लॉन्चिंग बाजार का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा, जिससे इसरो पर से छोटे कमर्शियल प्रोजेक्ट्स का बोझ कम होगा और वह गहरे अंतरिक्ष मिशनों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।"

पूर्व इसरो वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका द्वारा स्थापित 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने इस कामयाबी के साथ भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम को एक नई बुलंदी पर पहुंचा दिया है।