देश में कितने जंतर-मंतर, किसने और क्यों बनवाया था इन्हें ?
सिर्फ एक स्मारक नहीं, यह प्राचीन भारत की वो स्पेस लैब (Space Lab) है जो आज भी वैज्ञानिकों को हैरान करती है।
भारत में 'जंतर-मंतर' केवल एक जगह या विरोध-प्रदर्शन का मैदान नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय विज्ञान और खगोल विज्ञान (Astronomy) का एक अद्भुत चमत्कार है। आइए जानते हैं देश में कुल कितने जंतर-मंतर हैं, इन्हें किसने और क्यों बनवाया था।
किसने बनवाया था जंतर-मंतर?
इन ऐतिहासिक वेधशालाओं (Observatories) का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय (Maharaja Sawai Jai Singh II) ने करवाया था। राजा जयसिंह राजनीति और युद्ध कला के साथ-साथ गणित, खगोल विज्ञान और वास्तुकला के बहुत बड़े जानकार थे।
देश में कुल कितने जंतर-मंतर हैं?
महाराजा सवाई जयसिंह ने देश में कुल 5 जंतर-मंतर बनवाए थे। इनका निर्माण 1724 से 1735 के बीच कराया गया था:
-
दिल्ली: यह सबसे पहला जंतर-मंतर है, जिसका निर्माण 1724 में हुआ था।
-
जयपुर: यह सबसे बड़ा जंतर-मंतर है। यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी 'वृहद सम्राट यंत्र' मौजूद है। जयपुर के जंतर-मंतर को UNESCO की विश्व धरोहर (World Heritage Site) सूची में भी शामिल किया गया है।
-
उज्जैन: उज्जैन को प्राचीन काल से ही भारतीय भूगोल का शून्य रेखांश (Prime Meridian) माना जाता रहा है, इसलिए यहाँ भी एक वेधशाला बनाई गई।
-
वाराणसी (बनारस): यह मानसिंह महल की छत पर स्थित है।
-
मथुरा: समय के साथ और रखरखाव की कमी के कारण मथुरा का जंतर-मंतर 1857 के विद्रोह से पहले ही नष्ट हो गया था।
इन्हें क्यों बनवाया गया था? (मकसद और विज्ञान)
राजा जयसिंह ने पाया कि उस समय ग्रहों और सितारों की स्थिति जानने के लिए जो तालिकाएं (Tables) इस्तेमाल होती थीं, वे सटीक नहीं थीं। विदेशी यंत्र पीतल के बने होते थे, जिनमें मौसम के बदलाव के कारण त्रुटि (Error) आ जाती थी। इसलिए उन्होंने पत्थर और चूने के विशाल यंत्र बनवाए ताकि:
-
सटीक समय का पता लगाया जा सके: धूपघड़ी की मदद से मिनटों और सेकंडों तक का सटीक स्थानीय समय मापा जाता था।
-
तारों और ग्रहों की चाल: सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की सटीक स्थिति और उनकी गति को ट्रैक किया जा सके।
-
कैलेंडर और पंचांग को सुधारना: मौसम, ग्रहण (Solar and Lunar Eclipses) और त्योहारों की सटीक भविष्यवाणियों के लिए पंचांग को अपडेट किया जा सके।
नाम का अर्थ: 'जंतर-मंतर' शब्द संस्कृत के 'यंत्र-मंत्र' से बना है। यहाँ 'जंतर' (यंत्र) का मतलब उपकरण या मशीन है, और 'मंतर' (मंत्र) का मतलब गणना या फॉर्मूला है। यानी "गणना करने वाले उपकरण"।
आज भी इन वेधशालाओं की सटीकता आधुनिक वैज्ञानिकों को हैरान करती है। यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आधुनिक तकनीक आने से सदियों पहले भी भारत का विज्ञान कितना उन्नत था।
Matrimonial

BRG News 


