वंदे मातरम के अपमान या गायन रोकने पर अब होगी 3 साल की जेल !
संसद के मॉनसून सत्र में पेश होने वाले नए बिल के तहत, राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या बाधा पहुंचाने पर दोषी को 3 साल तक की सजा हो सकती है। राष्ट्रगान और तिरंगे की तरह अब 'वंदे मातरम' को भी मिलेगा पूर्ण कानूनी कवच।
'राष्ट्रीय गीत' वंदे मातरम के गायन को रोकने पर होगी 3 साल की सजा, मोदी सरकार संसद में लाने जा रही है नया बिल
देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सम्मान और गरिमा को और अधिक मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार एक ऐतिहासिक कानूनी कदम उठाने जा रही है।
प्रस्तावित कानून के तहत, वंदे मातरम का अपमान करने या इसके गायन में अड़चन डालने वाले दोषियों को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
क्या है सरकार का प्लान और किस कानून में होगा बदलाव?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में बड़ा संशोधन करने जा रही है।
अभी क्या है नियम?
वर्तमान में 1971 के इस मूल अधिनियम के तहत केवल राष्ट्रगान (जन गण मन), राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) और भारत के संविधान के अपमान को ही दंडनीय अपराध माना गया है, जिसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
इस नए संशोधन के जरिए अब राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) को भी इसी श्रेणी में शामिल कर समान कानूनी संरक्षण दिया जा रहा है।
गृह मंत्रालय ने पहले ही जारी किए थे कड़े निर्देश
इस साल की शुरुआत में ही केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने राष्ट्रीय गीत को लेकर कुछ महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की थीं। इसके तहत:
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सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी 6 पदों (Stanzas) को गाया या बजाया जाना अनिवार्य किया गया है (जो लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का होता है)।
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इसके अलावा, जब भी वंदे मातरम का गायन हो, तो राष्ट्रगान की तरह ही सभी के लिए सावधान (Attention) की मुद्रा में खड़ा होना भी अनिवार्य किया गया है।
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अब इस नए बिल के पास होने के बाद इन दिशा-निर्देशों को एक मजबूत वैधानिक (कानूनी) दर्जा मिल जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित 'वंदे मातरम' का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक अविस्मरणीय और गौरवशाली इतिहास रहा है। हालांकि, कानूनी तौर पर इसे राष्ट्रगान के समान अधिकार प्राप्त होने के बावजूद 1971 के दंडात्मक अधिनियम में जगह नहीं मिली थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के आने के बाद सार्वजनिक मंचों या आयोजनों में राष्ट्रीय गीत के दौरान होने वाले विवादों और जानबूझकर किए जाने वाले व्यवधानों पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
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