POCSO पर SC की बड़ी टिप्पणी !
सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों (Teenagers) के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई है, विशेषकर उन मामलों में जहाँ वे घर से भाग जाते हैं।
पॉक्सो (POCSO) कानून के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "लड़का-लड़की को घर से भागने से सरकार कैसे रोकेगी? यह नई चीजें आजमाने की उम्र है"
सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों (Teenagers) के बीच आपसी सहमति से बनने वाले रिश्तों और घर से भागने (Elopement) के मामलों में POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act के दुरुपयोग पर गहरा दुख और चिंता जताई है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद मानवीय और व्यावहारिक रुख अपनाते हुए सवाल किया कि सरकार या राज्य भला किसी प्यार करने वाले लड़का-लड़की को भागने से कैसे रोक सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या-क्या कहा?
जस्टिस बी.वी.
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"राज्य कैसे रोक सकता है?"
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "यदि 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोर आपसी सहमति से घर से भाग जाते हैं, तो राज्य प्रशासन या पुलिस उन्हें कैसे रोक सकती है? पॉक्सो कानून बच्चों को यौन शोषण और गंभीर अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया था, न कि आपसी सहमति वाले प्रेम संबंधों को सजा देने के लिए।"
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माता-पिता द्वारा 'इज्जत' बचाने के लिए केस दर्ज कराना:
अदालत ने कहा कि जब कोई नाबालिग लड़की अपनी मर्जी से किसी लड़के के साथ चली जाती है, तो माता-पिता अक्सर अपनी तथाकथित 'सामाजिक प्रतिष्ठा' या 'इज्जत' (Social Honour) बचाने के लिए लड़के के खिलाफ अपहरण और पॉक्सो (POCSO) के कड़े प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करा देते हैं।
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उम्र का दायरा और सहमति की सीमा:
पीठ ने ध्यान दिलाया कि 2012 में सहमति की कानूनी उम्र (Age of Consent) को 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया गया था। इसके बाद से 16-17 वर्ष के किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्ते भी कानून की नजर में अपराध की श्रेणी में आ गए हैं, जिसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।
'रोमियो-जूलियट क्लॉज' (Romeo-Juliet Clause) की मांग क्यों उठ रही है?
यह पहला मौका नहीं है जब शीर्ष अदालत ने इस विषय पर सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट और देश की विभिन्न हाईकोर्ट्स (जैसे मद्रास और दिल्ली हाईकोर्ट) लगातार इस बात पर जोर दे चुकी हैं कि सच्चे और सहमति वाले किशोर प्रेम संबंधों को POCSO के सख्त शिकंजे से मुक्त किया जाना चाहिए।
क्या है 'रोमियो-जूलियट क्लॉज'?
दुनिया के कई देशों में लागू 'रोमियो-जूलियट' प्रावधान कानून का ऐसा हिस्सा है, जो लगभग समान उम्र (जैसे 2-3 साल का अंतर) वाले किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक या प्रेम संबंधों को आपराधिक श्रेणी (Statutory Rape या POCSO) से बाहर रखता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को इस तरह के छूट प्रावधान पर विचार करने की सलाह दी है।
समस्या की जड़: कानून बनाम व्यावहारिक सच्चाई
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असली अपराधियों की जगह युवाओं पर केस:
पॉक्सो कानून का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधियों और दरिंदों से सुरक्षा देना था। लेकिन अदालतों के आंकड़ों के अनुसार, इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों का एक बड़ा हिस्सा ऐसे मामलों का है जहां किशोरी खुद कोर्ट में आकर कहती है कि वह अपनी मर्जी से गई थी। -
लड़कों का करियर और भविष्य बर्बाद: झूठे या पारिवारिक दबाव में दर्ज मुकदमों के कारण 18-20 साल के लड़कों को जेल जाना पड़ता है, जिससे उनका करियर पूरी तरह तबाह हो जाता है।
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दुरुपयोग करने वालों पर हो कार्रवाई:
शीर्ष अदालत ने यह भी सुझाव दिया है कि जो लोग आपसी रंजिश या अपनी मर्जी थोपने के लिए पॉक्सो कानून का गलत इस्तेमाल करते हैं, उनके खिलाफ भी सख्त दंडात्मक तंत्र होना चाहिए।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर व्यावहारिक और धरातल पर लागू होने वाले निर्देश जारी करना चाहता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को किशोरों के अधिकारों की रक्षा और कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस दिशानिर्देश तैयार करने में सहयोग करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई जल्द ही होगी।
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