गिरनार में अब थर्मल ड्रोन और 25 ट्रैकर्स रखेंगे शेरों की हर मूवमेंट पर नज़र !
गिरनार यात्रा होगी और भी सुरक्षित! हादसों के बाद प्रशासन का बड़ा फैसला— सीढ़ी मार्ग 'साइलेंस ज़ोन' घोषित।
गिरनार हमले के बाद बड़ा फैसला: गिरनार और दातार सीढ़ी मार्ग 'साइलेंस ज़ोन' घोषित !
जूनागढ़ के प्रसिद्ध तीर्थस्थल गिरनार वन्यजीव अभयारण्य में सीढ़ी मार्ग पर शेर के हमले में 11 वर्षीय मासूम बच्चे मयूर चौहान की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है। घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए वन विभाग और राज्य सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं।
सचिवालय में वन एवं पर्यावरण विभाग की आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े फैसले लिए गए हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्थायी चेकपोस्ट और विशेष समिति
शेरों और अन्य हिंसक वन्यजीवों के बढ़ते हमलों को रोकने के लिए वन विभाग ने गिरनार अभयारण्य के सीढ़ी मार्ग के आसपास के अत्यधिक संवेदनशील पॉइंट्स की पहचान की है।
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स्थायी चेकपोस्ट: संवेदनशील स्थानों पर वन विभाग द्वारा स्थायी चेकपोस्ट बनाए जाएंगे, जहां वन कर्मचारी चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे। यदि कोई वन्यजीव सीढ़ी मार्ग की ओर बढ़ेगा तो श्रद्धालुओं को पहले ही अलर्ट किया जा सकेगा।
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विशेष समिति का गठन: वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि जूनागढ़ जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति वन विभाग, पुलिस प्रशासन, स्थानीय नगर निगम और मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नई गाइडलाइन (SOP) तैयार करेगी।
गिरनार और दातार सीढ़ी मार्ग 'साइलेंस ज़ोन' घोषित
वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से घूम सकें और मानवीय हस्तक्षेप या शोर-शराबे के कारण हिंसक न हों, इसके लिए सरकार द्वारा ऐतिहासिक फैसला लिया गया है:
महत्वपूर्ण फैसला: गिरनार और दातार सीढ़ी मार्ग को आधिकारिक तौर पर 'साइलेंस ज़ोन' (शांत क्षेत्र) घोषित किया गया है। अब से इस पूरे मार्ग पर लाउडस्पीकर, म्यूजिक बजाने, ढोल-नगाड़े या किसी भी प्रकार का शोर-शराबा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
25 प्रशिक्षित ट्रैकर्स और थर्मल ड्रोन से सघन निगरानी
श्रद्धालुओं को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक और मानवबल का समन्वय करने का निर्णय लिया है:
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प्रशिक्षित ट्रैकर्स की तैनाती: सीढ़ी मार्ग पर स्थायी रूप से 25 विशेष प्रशिक्षित ट्रैकर्स तैनात किए जाएंगे। ये ट्रैकर्स लगातार पैदल गश्त करके वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
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थर्मल ड्रोन तकनीक: रात के समय या घने जंगल के इलाकों में शेरों की आवाजाही को सटीकता से ट्रैक करने के लिए थर्मल ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को होने से पहले ही रोका जा सके।
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