हवाई जहाज का टिकट अब जेब नहीं काटेगा, सुप्रीम कोर्ट का मनमाने किराए पर सख्त रुख !
सुप्रीम कोर्ट का सख्त कदम;केंद्र से 2 हफ्ते में ड्राफ्ट नियमों पर रिपोर्ट तलब। क्या अब आम आदमी को राहत मिलेगी?
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: त्योहारों पर मनमाने हवाई किराए पर लगेगी लगाम, केंद्र से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
त्योहारों, छुट्टियों और आपात स्थिति के दौरान विमान कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने हवाई किराए (Surge Pricing) पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
13 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने पीठ को सूचित किया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियमों का मसौदा (Draft Rules) तैयार कर लिया गया है और वर्तमान में यह अनुवाद (Translation) की प्रक्रिया में है, जिसके बाद इसे संसद के समक्ष रखा जाएगा।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया:
"हम प्रतिवादियों को दो सप्ताह का समय देते हैं कि वे इस कोर्ट के सामने सीलबंद लिफ़ाफ़े में वे नियम रखें जो बनाए गए हैं, चाहे उन्हें संसद के सदनों में पेश किया गया हो या नहीं।"
याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
सामाजिक कार्यकर्ता एस.
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300% तक बढ़ा किराया:
त्योहारों, प्राकृतिक आपदाओं या छुट्टियों के सीजन में एयरलाइंस dynamic pricing algorithms का सहारा लेकर टिकट दरों में 100% से 300% तक का अनुचित उछाल लाती हैं। -
फ्यूल का कम योगदान फिर भी भारी बढ़ोतरी:
याचिकाकर्ता के अनुसार, हवाई किराए में जेट फ्यूल (ATF) का योगदान केवल 10% के आसपास होता है, लेकिन किरायों में वृद्धि बेहद अत्यधिक और अनुचित होती है। -
फ्री बैगेज लिमिट में कटौती:
इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा पहले 25 किलोग्राम हुआ करती थी, जिसे घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया गया है। इससे बिना सामान यात्रा करने वाले यात्रियों को कोई छूट नहीं मिलती, बल्कि अतिरिक्त सामान के लिए नया राजस्व जरिया बना लिया गया है। -
छिपे हुए शुल्क और रिफंड नीतियां: टिकट कैंसिल करने के नियम, ऑन-ग्राउंड शिकायत निवारण प्रणाली की कमी और कई प्रकार के अतिरिक्त (Ancillary) शुल्क यात्रियों पर थोपे जा रहे हैं।
आगे क्या होगा?
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केंद्र सरकार अगले 14 दिनों में नागरिक विमानन मंत्रालय द्वारा तैयार नियमों की प्रति सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।
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यदि नए नियमों से एयरलाइंस की डायनेमिक प्राइजिंग और मनमाने शुल्कों पर कैपिंग (सीमा) तय होती है, तो त्योहारों और इमरजेंसी में यात्रा करने वाले आम यात्रियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
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इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 3 अगस्त 2026 को तय की गई है।
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