गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर !
गुजरात में तेजी से पांव पसार रहा है चांदीपुरा वायरस। बुखार, उल्टी और झटके इसके मुख्य लक्षण हैं। लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर: 12 बच्चों की मौत से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
गुजरात में मानसून की शुरुआत के साथ ही चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में संदिग्ध और कन्फर्म मामलों के कारण हड़कंप मच गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस घातक संक्रमण से 12 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनमें 3 पॉजिटिव और 9 संदिग्ध मामले शामिल हैं। इसके अलावा, 2 पॉजिटिव और 5 संदिग्धों सहित कुल 7 बच्चे अस्पताल में उपचाराधीन (सारवार में) हैं।
उत्तर गुजरात और पूर्वी आदिवासी क्षेत्रों (जैसे साबरकांठा, पंचमहल, खेड़ा और अरावली) में इस वायरस का असर सबसे अधिक देखा जा रहा है।
आंकड़ों पर एक नजर
-
कुल मौतें: 12 बच्चे (3 लैब कन्फर्म पॉजिटिव + 9 संदिग्ध)
-
इलाजरत (सारवार में): 7 बच्चे (2 लैब कन्फर्म पॉजिटिव + 5 संदिग्ध)
-
प्रभावित वर्ग: मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चे
क्या है चांदीपुरा वायरस और यह कैसे फैलता है?
चांदीपुरा वायरस (CHPV) रेब्डोविरिडे परिवार का एक आरएनए (RNA) वायरस है, जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी/रेत की मक्खी) के काटने से फैलता है। मानसून के मौसम में इन मक्खियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: यह वायरस इंसानों से इंसानों में हवा या छूने से नहीं फैलता। यह केवल संक्रमित कीटों के काटने से शरीर में प्रवेश करता है और सीधे सेंट्रल नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में सूजन (Acute Encephalitis Syndrome - AES) आ जाती है।
मुख्य लक्षण (Symptoms)
इस संक्रमण के लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं और स्थिति 24 से 48 घंटों के भीतर गंभीर हो सकती है:
-
अचानक तेज बुखार: अचानक बहुत तेज बुखार आना।
-
उल्टी और दस्त: पेट दर्द के साथ बार-बार उल्टी होना।
-
ऐंठन और झटके (Seizures): मांसपेशियों में खिंचाव या मिर्गी जैसे झटके आना।
-
सुस्ती और बेहोशी: बच्चे का अत्यधिक सुस्त होना, मानसिक भ्रम या बेहोश हो जाना।
इलाज और बचाव के उपाय
वर्तमान में चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टरों द्वारा मरीज की स्थिति के आधार पर सिम्टमैटिक इलाज (Supportive Care) दिया जाता है।
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां:
-
कीटों से सुरक्षा: बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं और रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
-
सैंडफ्लाई नियंत्रण: कच्चे मकानों या दीवारों की दरारों में सैंडफ्लाई पनपती हैं, उन्हें सीमेंट या मिट्टी से भरें।
-
स्वच्छता और छिड़काव: घर के आसपास कीटनाशक छिड़काव (जैसे मैलाथियान पाउडर) करवाएं और जलभराव न होने दें।
-
त्वरित डॉक्टरी सलाह: यदि बच्चे को अचानक तेज बुखार या उल्टी की शिकायत हो, तो बिना देर किए नजदीकी सरकारी या बड़े अस्पताल ले जाएं। शुरुआती 24 घंटे मरीज की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
Matrimonial

BRG News 


