अब दुनिया कहती है — 'Heal in India' !

पिछले 16 सालों में भारत में इलाज कराने आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या 1.12 लाख से बढ़कर 5 लाख के पार पहुँच चुकी है।

अब दुनिया कहती है — 'Heal in India' !

भारत बना ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म का हब: 16 साल में विदेशी मरीज 4.5 गुना बढ़े !

भारत अब केवल सस्ती दवाओं का देश नहीं, बल्कि दुनिया के लिए विश्वस्तरीय और किफायती इलाज का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। पिछले 16 वर्षों में भारत में इलाज कराने आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या में करीब 4.5 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय और उद्योग विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, 2009 में जहां लगभग 1.12 लाख विदेशी मरीज भारत आए थे, वहीं यह आंकड़ा बढ़कर 5 लाख के पार पहुंच चुका है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 1.56 लाख करोड़ रुपये (लगभग 16 अरब डॉलर) के विशाल आंकड़े को छू लेगा।

इन देशों से सबसे ज्यादा पहुंच रहे मरीज

भारत की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक अस्पतालों के प्रति वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। भारत में सबसे अधिक मरीज निम्नलिखित देशों से पहुंच रहे हैं:

  • बांग्लादेश (कुल मरीजों का सबसे बड़ा हिस्सा)

  • इराक

  • उज्बेकिस्तान

  • सोमालिया

  • ओमान

  • केन्या

इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के विकसित देशों से भी बड़ी संख्या में लोग जटिल सर्जरियों, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और डेंटल केयर के लिए भारत का रुख कर रहे हैं।

पश्चिमी देशों की तुलना में 70-80% सस्ता इलाज

भारत की ओर विदेशी मरीजों के खिंचाव की सबसे बड़ी वजह किफायती खर्च और जीरो वेटिंग टाइम है।

खर्च में बड़ा अंतर: अमेरिका या ब्रिटेन में जिस जटिल सर्जरी पर $15,000 (लगभग ₹12-13 लाख) खर्च होते हैं, वही इलाज भारत में अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले NABH अस्पतालों में ₹1.5 से ₹2 लाख के भीतर संभव हो जाता है। नीदरलैंड्स में दांतों के इलाज पर जहाँ भारी खर्च आता है, भारत में वही इलाज महज कुछ हजार रुपयों में उच्च गुणवत्ता के साथ हो जाता है।

मुख्य आकर्षण:

  1. तुरंत अपॉइंटमेंट: अमेरिका और यूरोप में न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक या कार्डिएक कंसल्टेशन के लिए मरीजों को 6 महीने से 1 साल तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि भारत में अगले ही दिन जांच और परामर्श मिल जाता है।

  2. विशेषज्ञ डॉक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत में 1,200 से अधिक NABH मान्यता प्राप्त अस्पताल हैं और लाखों प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं।

  3. पारदर्शी और तय खर्च: मरीजों को अस्पताल आने से पहले ही डिजिटल माध्यमों से इलाज और जांच का अनुमानित बजट पता चल जाता है।

सरकार की नीतियों से मिली रफ्तार: ई-वीजा और 'हीलिंग इन इंडिया'

सरकार की सुगम वीजा नीतियों और डिजिटल पहलों ने इस ग्रोथ को दोगुना कर दिया है:

  • 172 देशों को ई-मेडिकल वीजा: मरीज और उनके सहायकों के लिए ई-मेडिकल वीजा प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और तेज कर दिया गया है।

  • ई-आयुष वीजा: आयुर्वेद, योग, यूनानी और नेचुरोपैथी जैसी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से इलाज कराने वालों के लिए एक विशेष 'ई-आयुष वीजा' श्रेणी शुरू की गई है।

  • 5 नए रीजनल मेडिकल हब: केंद्र सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में 5 एकीकृत रीजनल मेडिकल टूरिज्म हब स्थापित कर रही है, जहां इलाज, रिसर्च और एजुकेशन की आधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे होंगी।

  • 'Heal in India' पोर्टल: विदेशी मरीजों को डॉक्टरों का चयन, अपॉइंटमेंट और वीजा आवेदन एक ही साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

भविष्य की राह

आयुर्वेद व मॉडर्न मेडिसिन के बेहतरीन मेल, रोबोटिक सर्जरी और एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स के बल पर भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) का निर्विवाद वैश्विक लीडर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह सेक्टर न केवल देश की अर्थव्यवस्था को विदेशी मुद्रा से मजबूत कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में लाखों नए रोजगार भी पैदा कर रहा है।