AIIMS दिल्ली में शुरू हुआ AI का 'जादू'; कैंसर और टीबी की खैर नहीं !

एम्स दिल्ली में एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई' की शुरुआत से अब कैंसर, टीबी और हृदय रोगों की पहचान मिनटों में संभव होगी। यह तकनीक न केवल निदान को सटीक बनाएगी बल्कि गंभीर बीमारियों के उपचार में लगने वाले समय और खर्च को भी कम करेगी।

AIIMS दिल्ली में शुरू हुआ AI का 'जादू'; कैंसर और टीबी की खैर नहीं !

AIIMS दिल्ली में AI से इलाज शुरू: अब कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों की होगी 'सुपरफास्ट' पहचान

चिकित्सा विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक के मिलन से अब मरीजों का इलाज और भी आसान होने जा रहा है। दिल्ली एम्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डायग्नोस्टिक और ट्रीटमेंट सेवाओं को आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया गया है। इस तकनीक के आने से न केवल डॉक्टरों का कार्यभार कम होगा, बल्कि उन बीमारियों की पहचान भी समय रहते संभव हो सकेगी जिन्हें पकड़ना पहले चुनौतीपूर्ण था।

किन बीमारियों की होगी जल्दी पहचान?

एम्स में एआई का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित रोगों के सटीक निदान के लिए किया जा रहा है:

  • कैंसर (Cancer): एम्स ने iOncology.ai प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह स्तन (Breast) और डिम्बग्रंथि (Ovarian) कैंसर की शुरुआती चरणों में पहचान करने में सक्षम है। यह हजारों रेडियोलॉजिकल इमेज का विश्लेषण कर मामूली से मामूली गांठ का भी पता लगा सकता है।

  • तपेदिक (TB): 'कफ अगेंस्ट टीबी' (CA-TB) एआई टूल के जरिए मरीज के खांसने की आवाज और एक्सरे (X-ray) रिपोर्ट से ही टीबी की पहचान की जा रही है।

  • हृदय रोग (Cardiac Diseases): एआई एल्गोरिदम अब ईसीजी (ECG) और हार्ट स्कैन का विश्लेषण कर भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक के जोखिम की चेतावनी पहले ही दे सकते हैं।

  • डायबिटिक रेटिनोपैथी: मधुनेत्र एआई (MadhuNetrAI) के जरिए आंखों की जांच कर मधुमेह (Diabetes) से होने वाले अंधेपन को समय रहते रोका जा रहा है।

  • फेफड़ों की बीमारी: हाल ही में एम्स ने एक ऐसे एआई ऐप का परीक्षण किया है जो COPD और अस्थमा के मरीजों की पहचान स्मार्टफोन के जरिए कर सकता है।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

  1. कम समय में रिपोर्ट: एआई उन रिपोर्ट्स को मिनटों में स्कैन कर सकता है जिन्हें देखने में डॉक्टरों को घंटों लगते थे।

  2. सटीक निदान: मानवीय त्रुटि (Human Error) की संभावना कम हो जाती है, जिससे सही इलाज तुरंत शुरू हो सकता है।

  3. सस्ता इलाज: बीमारी की जल्दी पहचान होने से इलाज का खर्च और जटिलता दोनों कम हो जाते हैं।

भारत-फ्रांस डिजिटल हेल्थ सहयोग

फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और भारत के स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स में 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ' का शुभारंभ किया। यह केंद्र एआई आधारित शोध और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देगा, जिससे जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान तकनीक की मदद से किया जा सके।