नाम बदल गया: केरल का नाम अब 'केरलम', मोदी सरकार का बड़ा फैसला !

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 'केरल' का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला राज्य की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।

नाम बदल गया: केरल का नाम अब 'केरलम', मोदी सरकार का बड़ा फैसला !

अब 'केरल' नहीं, 'केरलम' कहिए ! मोदी कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दक्षिण भारतीय राज्य 'केरल' का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नवनिर्मित पीएमओ बिल्डिंग 'सेवा तीर्थ' में हुई कैबिनेट बैठक में यह बड़ा निर्णय लिया गया।

यह कदम केरल की भाषाई पहचान और राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है।


क्यों बदला जा रहा है नाम?

राज्य का नाम बदलने के पीछे मुख्य कारण भाषाई और सांस्कृतिक विरासत है।

  • मलयालम कनेक्शन: मलयालम भाषा में राज्य को 'केरलम' ही कहा जाता है। राज्य सरकार का तर्क है कि 'केरल' शब्द अंग्रेजी प्रभाव या अन्य भाषाओं के उच्चारण के कारण प्रचलित हुआ, जबकि मूल नाम 'केरलम' है।

  • विधानसभा का प्रस्ताव: जून 2024 में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का नाम 'केरलम' करने का आग्रह किया गया था।


क्या है संवैधानिक प्रक्रिया? (अनुच्छेद 3)

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह मामला अंतिम चरणों में है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य का नाम बदलने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है:

  1. राष्ट्रपति की अनुशंसा: अब राष्ट्रपति "केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026" को औपचारिक रूप से केरल विधानसभा को उसकी राय के लिए भेजेंगे।

  2. संसद में विधेयक: विधानसभा की राय मिलने के बाद केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पेश करेगी।

  3. संविधान संशोधन: संसद से पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद, संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव किया जाएगा और नया नाम अधिसूचित हो जाएगा।


राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व

केरल में आगामी विधानसभा चुनावों (अप्रैल-मई 2026) से ठीक पहले इस निर्णय को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार के इस कदम को राज्य की क्षेत्रीय भावनाओं और भाषाई गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह निर्णय "जनता की इच्छा" का प्रतिबिंब है।


1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर गठित हुए इस राज्य के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। 'केरलम' नाम न केवल इसकी जड़ों को मजबूत करेगा, बल्कि आधिकारिक दस्तावेजों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राज्य की नई पहचान बनेगा।