"खुद चले जाओ वरना..." घुसपैठियों को गृह मंत्री का आखिरी अल्टीमेटम !
देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं! गुजरात में घुसपैठियों पर गिरी गाज, जो स्वेच्छा से नहीं जाएंगे, उन्हें चुन-चुनकर डिपोर्ट किया जाएगा।
अमित शाह के एक आदेश से पूरे गुजरात में घुसपैठियों पर गाज: बांग्लादेश पहुंचता था देश का रुपया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कड़े रुख और सुरक्षा एजेंसियों को दिए गए विशेष निर्देशों के बाद गुजरात में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन (Mega Crackdown) शुरू हो गया है। इस राष्ट्रव्यापी '360-डिग्री सुरक्षा प्लान' के तहत गुजरात के तमाम बड़े शहरों और सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच में जो खुलासे हो रहे हैं, वे देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ वित्तीय व्यवस्था के लिए भी बेहद चौंकाने वाले हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री का कड़ा रुख और अल्टीमेटम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में अवैध प्रवासियों और देश में हो रहे "अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव" (Unnatural Demographic Change) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
गृह मंत्री की ओर से एक बड़ा बयान भी सामने आया है:
"जो लोग अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत आए हैं, वे स्वेच्छा से अपने देश वापस लौट जाएं। यदि वे पहचान अभियान शुरू होने से पहले खुद चले जाते हैं, तो प्रशासन उनकी सुरक्षित वापसी में मदद करेगा और उनके खिलाफ कोई कानूनी मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। लेकिन यदि वे पकड़े गए, तो उन्हें चुन-चुनकर डिपोर्ट (देश से बाहर) किया जाएगा।"
इस सख्त निर्देश के बाद गुजरात पुलिस, आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) और लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है।
गुजरात में 'मेगा क्रैकडाउन': कैसे चल रही है कार्रवाई?
अमित शाह के आदेश मिलते ही गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, कच्छ और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस ने सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
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पहचान पत्रों की स्क्रूटनी: पुलिस उन संदिग्धों को हिरासत में ले रही है जो वर्षों से स्थानीय बस्तियों में रह रहे हैं। उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी की बारीकी से जांच की जा रही है।
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मकान मालिकों और ठेकेदारों पर शिकंजा: टेक्सटाइल, कंस्ट्रक्शन और हीरा उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों का वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। जिन मकान मालिकों या ठेकेदारों ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के विदेशी नागरिकों को शरण दी थी, उनके खिलाफ भी कानूनी मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
चौंकाने वाला खुलासा: 'हवाला' के जरिए बांग्लादेश भेजा जा रहा था पैसा
इस पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के हाथ जो सबसे बड़ा इनपुट लगा है, वह है आर्थिक साम्राज्य और अवैध फंडिंग का नेटवर्क।
जांच में सामने आया है कि गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे ये घुसपैठिए केवल मजदूरी या छोटे-मोटे धंधे ही नहीं कर रहे थे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी चपत लगा रहे थे। ये लोग यहां अवैध रूप से पैसा कमाते थे और उस मोटी रकम को हवाला नेटवर्क और संदिग्ध डिजिटल चैनलों के माध्यम से अवैध रूप से बांग्लादेश ट्रांसफर कर रहे थे।
इस अवैध सिंडिकेट के कारण भारत का राजस्व (रुपया) बिना किसी टैक्स या रिकॉर्ड के सीधे तौर पर सीमा पार भेजा जा रहा था, जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था।
जालसाजी का बड़ा नेटवर्क: कैसे बने भारतीय दस्तावेज?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, घुसपैठियों को भारत में स्थापित करने के पीछे एक पूरा संगठित गिरोह (सिंडिकेट) काम कर रहा है।
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फर्जी पहचान पत्र: सीमा पार कराने के बाद स्थानीय एजेंटों की मदद से इन घुसपैठियों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल एलसी (Leaving Certificate) तैयार किए जाते हैं।
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सरकारी योजनाओं का लाभ: इन जाली दस्तावेजों के दम पर ये लोग असली आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी बनवा लेते हैं। इसके बाद वे भारत के वैध नागरिक बनकर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का अवैध रूप से लाभ भी उठा रहे थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर
अमित शाह की इस सख्ती का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। खुफिया रिपोर्टों और हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, कड़े एक्शन और देश भर में बनाए जा रहे डिटेंशन सेंटर्स के खौफ से कई घुसपैठिए अब खुद ही अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर वापस बांग्लादेश भागने की फिराक में हैं।
सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति (High-level Committee) का भी गठन किया है जो इस अवैध घुसपैठ के कारण हुए जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच कर रही है, ताकि भविष्य में इसे रोकने के लिए और अधिक कठोर कानून बनाए जा सकें। गुजरात का यह कड़ा मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बनता जा रहा है।
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