CJI VS NCERT: लोकतंत्र के मंदिर का अपमान नहीं सहेगा SC !
CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ ने NCERT किताबों में न्यायपालिका को 'भ्रष्ट' बताने वाले अंशों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी को भी संस्थान को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के नाम पर लोकतांत्रिक स्तंभों की साख गिराना स्वीकार्य नहीं है।
NCERT विवाद: जजों के भ्रष्टाचार वाले अंश पर भड़के CJI, कहा- "न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति किसी को नहीं"
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने हाल ही में NCERT की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। एक महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश की शीर्ष संवैधानिक संस्था की छवि को धूमिल करने की अनुमति किसी को भी नहीं दी जाएगी।
क्या था विवाद का मुख्य केंद्र?
विवाद NCERT की राजनीति विज्ञान (Political Science) की कक्षा 12वीं की पाठ्यपुस्तक से शुरू हुआ। पुस्तक के एक अध्याय में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी का उल्लेख किया गया था। इस सामग्री में यह संकेत देने की कोशिश की गई थी कि भारतीय न्यायपालिका के कुछ फैसलों और कार्यशैली में निष्पक्षता का अभाव रहा है।
CJI की मुख्य आपत्तियां
मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई अहम बातें कहीं:
-
संस्था की गरिमा: CJI ने कहा कि आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन स्कूली किताबों में बिना किसी ठोस आधार के न्यायपालिका को 'भ्रष्ट' के रूप में पेश करना गलत है।
-
युवा मन पर प्रभाव: उन्होंने चिंता जताई कि ऐसी सामग्री छात्रों के मन में लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ (Judiciary) के प्रति अविश्वास पैदा करती है।
-
संतुलित दृष्टिकोण की कमी: न्यायपालिका का तर्क है कि किताबों में केवल नकारात्मक पहलुओं को उजागर किया गया, जबकि न्यायपालिका द्वारा किए गए ऐतिहासिक सुधारों और जनहित के कार्यों को नजरअंदाज कर दिया गया।
"न्यायपालिका लोकतंत्र का रक्षक है। यदि शिक्षा के माध्यम से ही इसकी साख पर प्रहार किया जाएगा, तो जनता का इस पर से भरोसा उठ जाएगा। हम संस्थान को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते।" — CJI डी.वाई. चंद्रचूड़
न्यायपालिका और शिक्षा के बीच संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला एक बड़ी बहस को जन्म देता है: शैक्षणिक स्वतंत्रता बनाम संस्थान की गरिमा। जहाँ शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) सिखाना है, वहीं तथ्यों की सटीकता और संस्थान की मर्यादा का ध्यान रखना भी उतना ही अनिवार्य है।
CJI का यह कड़ा रुख यह संदेश देता है कि न्यायपालिका अपनी आलोचना से नहीं डरती, लेकिन वह अपनी छवि के साथ होने वाले किसी भी अनर्गल समझौते को बर्दाश्त नहीं करेगी। NCERT अब इन बदलावों को लागू कर एक नया और संतुलित पाठ्यक्रम पेश करने की तैयारी में है।
Matrimonial

BRG News 


