एयर एंबुलेंस: जानिए खर्च, नियम और परमिशन की पूरी प्रक्रिया !
एक विमान को एयर एंबुलेंस बनाने में करोड़ों का खर्च आता है और इसके लिए DGCA सहित कई सरकारी संस्थाओं से अनुमति लेनी होती है।
रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस चतना में क्रैश: जानें प्लेन को एयर एंबुलेंस बनाने में कितना आता है खर्च और कौन देता है परमिशन
रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस के चतना में क्रैश होने की दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। हादसे में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। ऐसे हादसों के बाद अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर एक विमान को एयर एंबुलेंस में बदलने की प्रक्रिया क्या होती है, कितना खर्च आता है और इसकी अनुमति कौन देता है?
आइए, इन सवालों को विस्तार से समझते हैं।
एयर एंबुलेंस क्या होती है?
एयर एंबुलेंस एक विशेष रूप से मॉडिफाइड विमान होता है, जिसमें गंभीर मरीजों को एक शहर से दूसरे शहर या विदेश तक ले जाने के लिए ICU जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इसमें स्ट्रेचर, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट, कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और प्रशिक्षित मेडिकल टीम मौजूद रहती है।
प्लेन को एयर एंबुलेंस बनाने में कितना खर्च आता है?
किसी सामान्य चार्टर विमान या छोटे जेट को एयर एंबुलेंस में बदलने का खर्च कई कारकों पर निर्भर करता है—जैसे विमान का आकार, मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन की जरूरत।
1️⃣ मेडिकल इंटीरियर मॉडिफिकेशन
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ICU सेटअप
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स्ट्रेचर लॉकिंग सिस्टम
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ऑक्सीजन सिलेंडर और पाइपलाइन
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लाइफ सपोर्ट सिस्टम
अनुमानित खर्च: ₹1 करोड़ से ₹5 करोड़
2️⃣ स्ट्रक्चरल बदलाव और सर्टिफिकेशन
विमान के अंदर मेडिकल उपकरण लगाने के लिए तकनीकी बदलाव और सेफ्टी अप्रूवल की जरूरत होती है।
अनुमानित खर्च: ₹50 लाख से ₹2 करोड़
3️⃣ लाइसेंस और ऑपरेशन कॉस्ट
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उड़ान का प्रति घंटे खर्च: ₹1.5 लाख से ₹3 लाख (विमान के प्रकार पर निर्भर)
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वार्षिक मेंटेनेंस: करोड़ों रुपये
कुल मिलाकर, एक विमान को पूरी तरह एयर एंबुलेंस में बदलने का शुरुआती खर्च ₹2 करोड़ से ₹8 करोड़ या उससे अधिक हो सकता है।
एयर एंबुलेंस ऑपरेट करने की परमिशन कौन देता है?
भारत में एयर एंबुलेंस सेवा शुरू करने के लिए कई सरकारी एजेंसियों से मंजूरी लेनी होती है:
1️⃣ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)
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एयरक्राफ्ट मॉडिफिकेशन की स्वीकृति
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एयरवर्दिनेस सर्टिफिकेट
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Non-Scheduled Operator Permit (NSOP)
2️⃣ नागरिक उड्डयन मंत्रालय
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एविएशन पॉलिसी और लाइसेंस संबंधी नियम
3️⃣ एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI)
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एयरपोर्ट स्लॉट और ऑपरेशन क्लियरेंस
4️⃣ राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग
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मेडिकल ट्रांसपोर्ट से जुड़ी अनुमति
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आपातकालीन सेवाओं का पंजीकरण
5️⃣ अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए
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संबंधित देश से ओवरफ्लाइट और लैंडिंग परमिट
जरूरी दस्तावेज
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NSOP लाइसेंस
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एयरवर्दिनेस सर्टिफिकेट
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पायलट और क्रू का वैध लाइसेंस
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मेडिकल इक्विपमेंट का प्रमाणन
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इंश्योरेंस कवर
क्या कोई भी विमान एयर एंबुलेंस बन सकता है?
तकनीकी रूप से हां, लेकिन आमतौर पर छोटे जेट या टर्बोप्रॉप विमान का उपयोग किया जाता है क्योंकि वे छोटे रनवे पर उतर सकते हैं और ऑपरेटिंग कॉस्ट अपेक्षाकृत कम होती है।
निष्कर्ष
रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस हादसे जैसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि एविएशन और मेडिकल इमरजेंसी सेवाएं अत्यधिक संवेदनशील और रेगुलेटेड क्षेत्र हैं। एक विमान को एयर एंबुलेंस में बदलना महंगा और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें करोड़ों रुपये का निवेश और कई स्तर की सरकारी मंजूरी की जरूरत होती है।
एयर एंबुलेंस सेवा जीवन बचाने का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसकी सुरक्षा, रखरखाव और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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