भारत-PAK बॉर्डर पर 'प्रचंड' की गूंज: सह-पायलट बनीं राष्ट्रपति !

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरकर भारत-पाक सीमा पर एक नया सैन्य इतिहास रच दिया है।

भारत-PAK बॉर्डर पर 'प्रचंड' की गूंज: सह-पायलट बनीं राष्ट्रपति !

शक्ति और साहस का संगम: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'प्रचंड' में भरी उड़ान, भारत-पाक सीमा पर रचा इतिहास

भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राजस्थान के जोधपुर वायु सेना स्टेशन से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) 'प्रचंड' में ऐतिहासिक उड़ान भरी। लगभग 25-30 मिनट की इस सॉर्टी (उड़ान) के दौरान राष्ट्रपति ने न केवल हेलीकॉप्टर की क्षमताओं को परखा, बल्कि भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब सह-पायलट की भूमिका निभाकर दुनिया को भारत की सैन्य ताकत का संदेश भी दिया।

स्वदेशी 'प्रचंड' की ताकत को महसूस किया

राष्ट्रपति मुर्मू ने 'प्रचंड' के कॉकपिट में बैठकर युद्धक कौशल और इसकी हवाई कलाबाजियों का अनुभव किया। उड़ान के बाद उन्होंने रक्षा वैज्ञानिकों और वायु सेना के पायलटों की सराहना करते हुए कहा:

"स्वदेशी तकनीक से निर्मित प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए गौरव का क्षण है। यह हमारी 'आत्मनिर्भर भारत' की संकल्पना और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती ताकत का प्रतीक है।"

क्यों खास है यह उड़ान?

  1. सीमा पर निगरानी: यह उड़ान भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में भरी गई, जो रक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।

  2. पहली महिला राष्ट्रपति (LCH में): द्रौपदी मुर्मू प्रचंड हेलीकॉप्टर में उड़ान भरने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले प्रतिभा पाटिल ने सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी।

  3. स्वदेशी तकनीक का प्रदर्शन: 'प्रचंड' को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है।

'प्रचंड' की मुख्य विशेषताएँ

  • ऊंचाई पर मारक क्षमता: यह सियाचिन जैसे ठंडे और ऊंचे युद्ध क्षेत्रों में दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

  • हथियार: इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 20mm की बुर्ज गन और रॉकेट सिस्टम लगा है।

  • स्टील्थ फीचर: इसकी बनावट ऐसी है कि यह दुश्मन के रडार की नजर में आसानी से नहीं आता।

रक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति का उदय

राष्ट्रपति की यह उड़ान भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व का भी प्रतीक है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना ने युद्धक भूमिकाओं (Combat Roles) में महिलाओं को प्राथमिकता दी है, और राष्ट्रपति का खुद कॉकपिट में होना देश की बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।


राष्ट्रपति मुर्मू की 'प्रचंड' यात्रा ने न केवल स्वदेशी रक्षा उपकरणों के प्रति विश्वास बढ़ाया है, बल्कि यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से आत्मनिर्भर और तैयार है।