100 घंटे, 9 देश, 14 अमेरिकी बेस पर हमला !

ईरान पर अमेरिकी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के 100 घंटे पूरे होने पर 1,000 से अधिक मौतें और 17 ईरानी युद्धपोत डूबने की खबर है। जवाब में ईरान ने 9 देशों में स्थित 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण मिसाइल हमले कर पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक दिया है।

100 घंटे, 9 देश, 14 अमेरिकी बेस पर हमला !

मार्च 2026 में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी और इजरायली सेना द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) को 100 घंटे से अधिक का समय हो चुका है। इस भीषण सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व (Middle East) को युद्ध की आग में झोंक दिया है।


हताहतों की संख्या और तबाही का मंजर

पिछले 4 दिनों से जारी हवाई और मिसाइल हमलों ने ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है:

  • 1,000 से ज्यादा मौतें: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, अब तक 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर सैन्य कर्मी और सुरक्षा बल शामिल हैं।

  • ईरानी नौसेना लगभग खत्म: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, अमेरिका ने अब तक 17 ईरानी युद्धपोतों को डुबो दिया है, जिसमें ईरान की सबसे घातक पनडुब्बी (Submarine) भी शामिल है।

  • 2,000 सैन्य ठिकानों पर हमला: अमेरिकी B-2 और B-1 बमवर्षक विमानों ने ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड्स, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाया है।


ईरान का पलटवार: 9 देशों में अमेरिकी बेस पर हमला

ईरान ने इस हमले का जवाब देते हुए 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV' शुरू किया है:

  • 14 अमेरिकी ठिकानों पर निशाना: ईरान ने 9 देशों (जैसे कतर, यूएई, बहरीन, कुवैत और इराक) में स्थित 14 से अधिक अमेरिकी सैन्य बेस और दूतावासों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।

  • अल-उदैद बेस पर हमला: कतर स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य ठिकाने 'अल-उदैद' पर भी ईरानी मिसाइलें गिरने की खबर है।

  • आर्थिक केंद्रों पर असर: दुबई के जेबेल अली पोर्ट और सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास भी धमाके सुने गए हैं, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई और शेयर बाजारों में हड़कंप मच गया है।


युद्ध के मुख्य कारण और ताजा स्थिति

यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सर्जिकल स्ट्राइक की।

  1. नेतृत्व को निशाना: रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के परिसर को भी निशाना बनाया गया था।

  2. उद्देश्य: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन का कहना है कि इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना और क्षेत्र में उसके प्रभाव को रोकना है।

  3. विमान सेवाएं ठप: तनाव को देखते हुए एमिरेट्स (Emirates) जैसी बड़ी एयरलाइंस ने दुबई और अन्य खाड़ी देशों के लिए अपनी उड़ानें 7 मार्च तक रद्द कर दी हैं।

 स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है। भारत सरकार ने भी ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को घरों के अंदर रहने और दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी है।