अब OTP भी फेल; डिजिटल पेमेंट का नया नियम लागू !
डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए RBI ने आज से केवल OTP आधारित सिस्टम को बदल दिया है; अब बड़े ट्रांजेक्शन के लिए बायोमेट्रिक या पिन जैसी अतिरिक्त सुरक्षा लेयर अनिवार्य होगी।
सावधान ! आज से बदल गया डिजिटल पेमेंट का नियम...
अगर आप भी Google Pay, PhonePe, Paytm या नेट बैंकिंग के जरिए धड़ल्ले से ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आज, 1 अप्रैल से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल ट्रांजेक्शन को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए 'अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन लेयर' (Additional Factor of Authentication - AFA) के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है।
अब आपका लेनदेन केवल एक OTP (One-Time Password) के भरोसे पूरा नहीं होगा। आइए जानते हैं क्या है नया सिस्टम और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।
अब सिर्फ OTP क्यों काफी नहीं?
अभी तक ज्यादातर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए आपके मोबाइल पर आने वाला 6 अंकों का OTP ही अंतिम सुरक्षा कवच होता था। लेकिन बढ़ते हुए 'SIM Swapping' और 'OTP फ्रॉड' के मामलों को देखते हुए RBI ने अब इसे अपर्याप्त माना है। जालसाज अक्सर फिशिंग के जरिए आपका OTP हासिल कर लेते थे, जिससे पल भर में खाता खाली हो जाता था।
क्या है नया 'मल्टी-फैक्टर' सिस्टम?
आज से लागू नए नियमों के मुताबिक, बड़े ट्रांजेक्शन (खासकर ₹5,000 से ऊपर) के लिए बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स को इन तीन में से कम से कम दो सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा:
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Something you know: जैसे आपका पासवर्ड या पिन (PIN)।
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Something you have: जैसे आपका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (OTP) या हार्डवेयर टोकन।
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Something you are: जैसे आपका फिंगरप्रिंट, फेस आईडी (Biometric) या आइरिस स्कैन।
आज से क्या-क्या बदल गया?
1. बायोमेट्रिक अनिवार्य (Biometric Push)
अब कई पेमेंट ऐप्स बड़े भुगतान के लिए आपसे फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक की मांग करेंगे। भले ही आपने ऐप खोलते समय इसे किया हो, लेकिन ट्रांजेक्शन पूरा करने के लिए इसे दोबारा वेरिफाई करना पड़ सकता है।
2. डायनेमिक पासकोड का उपयोग
अब कुछ बैंक केवल 'स्टैटिक' OTP की जगह 'डायनेमिक लिंक-बेस्ड' ऑथेंटिकेशन शुरू कर रहे हैं, जहाँ आपको एक नोटिफिकेशन पर टैप करके अपनी सहमति देनी होगी।
3. नए डिवाइस पर कड़ाई
अगर आप किसी नए फोन या अनजाने कंप्यूटर से पेमेंट करने की कोशिश करेंगे, तो सिस्टम केवल OTP से काम नहीं चलाएगा। इसके लिए आपको डिग्री-वेरिफिकेशन या वीडियो केवाईसी जैसे अतिरिक्त चरणों से गुजरना पड़ सकता है।
4. सस्पेक्टेड ट्रांजेक्शन पर रोक
AI-आधारित नया सिस्टम अब आपके खर्च करने के पैटर्न पर नजर रखेगा। अगर कोई असामान्य ट्रांजेक्शन (जैसे अचानक बड़ी रकम का ट्रांसफर) होता है, तो बैंक उसे तब तक होल्ड कर देगा जब तक आप फोन कॉल या बैंकिंग ऐप के जरिए मैन्युअल पुष्टि नहीं कर देते।
आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?
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थोड़ा ज्यादा समय: पेमेंट करने में अब 10-20 सेकंड ज्यादा लग सकते हैं।
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ज्यादा सुरक्षा: आपके खाते से पैसा चोरी होने की संभावना लगभग शून्य हो जाएगी, क्योंकि केवल OTP चुराना अब स्कैमर्स के काम नहीं आएगा।
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स्मार्टफोन की जरूरत: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए अब अपडेटेड स्मार्टफोन और तेज इंटरनेट की जरूरत और बढ़ जाएगी।
विशेषज्ञ की सलाह: "यह बदलाव डिजिटल इंडिया की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर है। हालांकि इससे शुरुआत में थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन यह आपके मेहनत की कमाई को हाई-टेक चोरों से बचाने के लिए उठाया गया जरूरी कदम है।"
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