त्विशा शर्मा मर्डर केस: कई बड़े लूपहोल्स !
ट्विशा शर्मा हत्याकांड की जांच में पुलिसिया लापरवाही और कई बड़े लूपहोल्स (कमियां) सामने आए हैं, जिसमें क्राइम सीन से छेड़छाड़ और सीसीटीवी फुटेज का रहस्यमयी ढंग से गायब होना शामिल है।
त्विशा शर्मा मर्डर केस: जांच में सामने आए कई बड़े लूपहोल्स, क्या कातिल को बचाने की हो रही है कोशिश?
देश को झकझोर कर रख देने वाले 'ट्विशा शर्मा मर्डर केस' में हर गुजरते दिन के साथ नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जहां इसे एक सुलझा हुआ मामला मानकर चल रही थी, वहीं अब फॉरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयानों और क्राइम सीन के एनालिसिस ने पुलिसिया जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गहराई से पड़ताल करने पर कई ऐसे बड़े लूपहोल्स (कमियां) सामने आए हैं, जो इशारा करते हैं कि या तो जांच में भारी लापरवाही बरती गई है, या फिर किसी रसूखदार को बचाने की कोशिश की जा रही है।
यहाँ हम इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के उन 5 सबसे बड़े लूपहोल्स का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं, जिन्होंने पूरी जांच को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है:
1. क्राइम सीन से छेड़छाड़ और देरी से सील होना
किसी भी हत्याकांड की जांच में 'गोल्डन आवर्स' (शुरुआती कुछ घंटे) सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस मामले में सबसे पहला और बड़ा लूपहोल यह रहा कि वारदात की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने क्राइम सीन को तुरंत सील नहीं किया।
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लापरवाही: सूत्रों के मुताबिक, शव मिलने के करीब 4 घंटे बाद तक उस कमरे में कई बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहा।
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नुकसान: इस देरी के कारण फर्श पर मौजूद फुटप्रिंट्स (पैरों के निशान) और फिंगरप्रिंट्स पूरी तरह नष्ट हो गए। फॉरेंसिक टीम को देरी से बुलाए जाने के कारण कई अहम वैज्ञानिक सबूत मौके से गायब हो चुके थे।
2. फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम के समय में विसंगति
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस की थ्योरी में एक बहुत बड़ा अंतर (Missmatch) देखने को मिला है। पुलिस के मुताबिक ट्विशा की मौत रात के 11 से 12 बजे के बीच हुई थी, जिसके आधार पर उन्होंने मुख्य संदिग्ध का अलिकाई (Alibi - दूसरी जगह मौजूद होने का दावा) मान लिया।
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लूपहोल: हालांकि, पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों की शुरुआती राय के मुताबिक, पेट में मिले भोजन के पाचन (Digestion) की स्थिति को देखते हुए मौत का समय सुबह के 3 से 4 बजे के बीच का होना चाहिए। इस टाइम गैप को पुलिस अपनी चार्जशीट में स्पष्ट करने में नाकाम रही है।
3. मुख्य संदिग्ध का 'डिजिटल अलिकाई' और गायब मोबाइल
पुलिस ने मुख्य आरोपी के इस दावे को आसानी से स्वीकार कर लिया कि घटना के वक्त वह शहर से बाहर था, क्योंकि उसका मोबाइल टावर लोकेशन दूसरे राज्य में था।
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अधूरी जांच: साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के दौर में केवल मोबाइल लोकेशन के आधार पर किसी को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती। मोबाइल को किसी दूसरे व्यक्ति के पास छोड़कर खुद वारदात को अंजाम देना एक पुराना पैंतरा है।
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गायब सबूत: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ट्विशा का अपना मोबाइल फोन, जिसमें आखिरी कुछ घंटों के चैट और कॉल रिकॉर्ड्स थे, वारदात के बाद से ही गायब है। पुलिस ने उस फोन को खोजने या उसके क्लाउड डेटा को रिकवर करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
4. सीसीटीवी फुटेज का 'रहस्यमयी' गायब होना
अपार्टमेंट और सोसाइटी के मुख्य द्वार पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस केस का सबसे बड़ा सबूत बन सकती थी। लेकिन यहाँ भी एक बड़ा झोल सामने आया है।
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तकनीकी खामी या साजिश?: पुलिस का कहना है कि घटना वाली रात सोसाइटी के मुख्य डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण रात 2 बजे से सुबह 5 बजे तक की फुटेज रिकॉर्ड नहीं हो सकी।
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सवाल: फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि डीवीआर के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ (Tampering) की गई है, क्योंकि उससे ठीक पहले और बाद की फुटेज पूरी तरह सुरक्षित है।
5. गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पुलिस का ढुलमुल रवैया
सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड और ट्विशा के पड़ोसियों ने शुरुआती पूछताछ में पुलिस को बताया था कि उन्होंने रात को किसी के चिल्लाने की आवाज सुनी थी और एक संदिग्ध गाड़ी को तेजी से बाहर जाते देखा था।
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बयान बदलना: मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराते समय इन गवाहों के सुर पूरी तरह बदल गए। अब वे किसी भी तरह की आवाज या गाड़ी देखने से इनकार कर रहे हैं।
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दबाव की आशंका: ट्विशा के परिवार का आरोप है कि गवाहों को डराया-धमकाया गया है और पुलिस ने उन्हें सुरक्षा देने के बजाय संदिग्धों को खुलकर घूमने की आजादी दे रखी है।
क्या ट्विशा को मिलेगा इंसाफ?
इन तमाम लूपहोल्स को देखने के बाद यह साफ है कि जांच की दिशा भटकाने की पूरी कोशिश की गई है। ट्विशा शर्मा के परिजनों ने अब इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस से छीनकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या किसी स्वतंत्र एसआईटी (SIT) को सौंपने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। लेकिन एक बात तय है—जब तक इन बुनियादी सवालों और लूपहोल्स के जवाब नहीं मिलते, तब तक ट्विशा शर्मा हत्याकांड की गुत्थी कभी नहीं सुलझ पाएगी।
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