भारत में सूखे और भीषण गर्मी का संकट !
IMD के मुताबिक इस साल मानसून में सामान्य से कम (केवल 92%) बारिश होने का अनुमान है। हालांकि मानसून केरल में 26 मई के आसपास जल्दी दस्तक दे सकता है, लेकिन अल नीनो के कारण आगे चलकर इसकी रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी।
सुपर अल नीनो का खतरा: इस साल मानसून और गर्मी पर क्या होगा असर?
प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में तेजी से बदल रहे मौसमी घटनाक्रम ने भारत समेत पूरी दुनिया के जलवायु वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी मौसम एजेंसी 'नोआ' (NOAA) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमानों के मुताबिक, इस साल एक बेहद ताकतवर 'सुपर अल नीनो' सक्रिय होने जा रहा है, जो मई-जुलाई के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर लेगा और साल के अंत (दिसंबर 2026) तक बना रह सकता है।
इस भौगोलिक बदलाव का सीधा असर भारत के मानसून और तापमान पर पड़ने की पूरी आशंका है। आइए समझते हैं कि इसका क्या असर होगा:
1. कमजोर पड़ सकता है मानसून (Rainfall Below Normal)
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही इस साल मानसून के 'सामान्य से कम' (Below Average) रहने का पूर्वानुमान जारी किया है।
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92% बारिश का अनुमान: इस साल जून से सितंबर के दौरान दीर्घकालिक औसत (LPA) की तुलना में केवल 92 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है (जिसमें 5% ऊपर-नीचे होने का मार्जिन है)।
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शुरुआती दस्तक पर न जाएं: हालांकि मानसून केरल के तट पर अपने तय समय (1 जून) से लगभग 6 दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास दस्तक दे सकता है। लेकिन मौसम विशेषज्ञों का साफ कहना है कि मानसून के जल्दी आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बारिश अच्छी होगी। अल नीनो के एक्टिव होते ही मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी।
2. भीषण गर्मी और लू (Extreme Heatwave)
अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से $2^\circ\text{C}$ या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे वैश्विक तापमान में भारी बढ़ोतरी होती है।
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भारत के मध्य, उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी राज्यों (जैसे गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश) में मई और जून के महीनों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और गंभीर लू (Severe Heatwave) चलने की आशंका है।
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इस साल का समर सीजन पिछले कई सालों के गर्मी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है।
3. सूखे की आशंका (Risk of Drought)
भारत अपनी कृषि और जलाशयों के लिए 70% तक मानसून की बारिश पर निर्भर है। अल नीनो के लंबे समय तक खिंचने के कारण:
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देश के कई हिस्सों में सूखे (Drought) और पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
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कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों (धान, दलहन, तिलहन) के उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य कीमतों (महंगाई) पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या देश में कहीं राहत मिलेगी?
ऐसा नहीं है कि पूरे देश में सूखा रहेगा। आईएमडी (IMD) के अनुसार, जहां एक तरफ मध्य और पश्चिमी भारत सूखे और गर्मी की चपेट में रहेगा, वहीं पूर्वोत्तर भारत (North-East India) और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (South Peninsular India) के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। इसके अलावा, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों (जैसे केरल, तमिलनाडू और कर्नाटक) में शुरुआती दौर में भारी बारिश देखने को मिल सकती है।
क्या होता है सुपर अल नीनो?
जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाता है और हवाओं का रुख बदल जाता है, तो उस स्थिति को 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है। इतिहास में जब-जब ऐसा हुआ है (जैसे 2015-16 या उससे पहले 1877 में), तब-तब भारत को गंभीर सूखे और कमजोर मानसून का सामना करना पड़ा है।
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