केरल में मानसून की आहट तेज, तोड़ सकता है 35 साल का पुराना रिकॉर्ड, IMD ने की पुष्टि
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी सामान्य तारीख से पहले यानी 26 मई को केरल के तट पर दस्तक दे सकता है।
मानसून केरल पहुंचने में तोड़ेगा 35 साल का रिकॉर्ड? IMD ने बताया कब देगा दस्तक
देशभर में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का टॉर्चर झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी बड़ी खबर आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon 2026) के आगमन को लेकर अपनी आधिकारिक भविष्यवाणी जारी कर दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार मानसून अपनी सामान्य तारीख (1 जून) से पहले ही देश में एंट्री मार देगा।
सोशल मीडिया और कुछ मीडिया गलियारों में चर्चा है कि क्या मानसून इस बार केरल पहुंचने का 35 साल का रिकॉर्ड तोड़ देगा? आइए जानते हैं कि IMD के आंकड़ों की हकीकत क्या है और मानसून असल में किस दिन केरल के तट पर दस्तक देने जा रहा है।
क्या वाकई टूटेगा 35 साल का रिकॉर्ड?
अफवाहों और दावों के विपरीत, मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि मानसून इस बार समय से पहले जरूर आ रहा है, लेकिन यह कोई 35 साल का रिकॉर्ड नहीं तोड़ रहा है। खुद पिछले साल यानी 2025 में मानसून 24 मई को ही केरल पहुंच गया था, जो कि साल 2009 के बाद सबसे जल्दी आने का रिकॉर्ड था। इस साल भी मानसून सामान्य से करीब 6 दिन पहले दस्तक दे रहा है, जिसे 'जल्दी आगमन' (Early Onset) कहा जाएगा, न कि कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूटना।
IMD ने बताई पक्की तारीख: कब होगी पहली बारिश?
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, साल 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को केरल के तट पर दस्तक दे सकता है।
4 दिनों का मॉडल एरर मार्जिन:
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पूर्वानुमान में प्लस-माइनस 4 दिनों का अंतर हो सकता है। इसका मतलब है कि मानसून 22 मई से 30 मई के बीच किसी भी दिन केरल में पहली बौछारें गिरा सकता है।
फिलहाल, अंडमान सागर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण बंगाल की खाड़ी में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। यहां अगले 24 से 48 घंटों में मानसून सक्रिय हो जाएगा, जिसके ठीक बाद यह मुख्य भूमि (Mainland India) की तरफ रुख करेगा।
मानसून जल्दी, लेकिन बारिश 'सामान्य से कम' रहने की आशंका
इस साल मानसून भले ही समय से पहले आ रहा हो, लेकिन किसानों और आम जनता के लिए एक चिंता की बात भी सामने आई है। IMD और निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट (Skymet) दोनों के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस साल कुल मानसूनी बारिश सामान्य से कम (Below Normal) रहने की उम्मीद है।
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अनुमानित बारिश: दीर्घावधि औसत (LPA) का 92% रहने का अनुमान है।
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वजह: प्रशांत महासागर में एल नीनो (El Niño) की स्थिति सक्रिय होना। अल नीनो के प्रभाव के कारण आमतौर पर भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ती हैं और बारिश में कमी देखी जाती है।
किसानों और आम जनता पर क्या होगा असर?
केरल में 26 मई के आसपास मानसून आने के बाद यह धीरे-धीरे उत्तर और मध्य भारत की तरफ बढ़ेगा। जून के दूसरे सप्ताह तक इसके महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में पहुंचने की उम्मीद है।
समय से पहले मानसून आने से दक्षिण भारत के राज्यों में भीषण गर्मी से तुरंत राहत मिलेगी। हालांकि, खरीफ फसलों (धान, कपास, सोयाबीन, दालें) की बुवाई करने वाले किसानों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि शुरुआती बारिश के बाद पूरे सीजन में बारिश का वितरण कैसा रहता है, क्योंकि कम बारिश के चलते जलाशयों के जलस्तर और फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
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