परमाणु युद्ध का खतरा; WHO ने जारी किया हाई अलर्ट !

ईरान युद्ध के बीच परमाणु खतरे को देखते हुए WHO ने वैश्विक स्तर पर 'हाई अलर्ट' जारी कर रेडिएशन से निपटने की 'वर्स्ट-केस' तैयारियां शुरू कर दी हैं।

परमाणु युद्ध का खतरा;  WHO ने जारी किया हाई अलर्ट !

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध ने अब दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहाँ परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक लगने लगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस संभावित खतरे को देखते हुए 'हाई अलर्ट' जारी कर दिया है और 'वर्स्ट-केस' (सबसे खराब स्थिति) से निपटने के लिए वैश्विक तैयारियां शुरू कर दी हैं।


1. WHO का 'वर्स्ट-केस' प्लान क्या है?

WHO ने चेतावनी दी है कि परमाणु हमले या किसी न्यूक्लियर प्लांट में दुर्घटना की स्थिति में रेडिएशन का असर केवल वर्तमान पीढ़ी पर नहीं, बल्कि आने वाले दशकों तक रहेगा। इसके लिए संगठन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • दवाओं का स्टॉक: WHO ने सदस्य देशों से पोटेशियम आयोडाइड (Potassium Iodide) जैसी रेडिएशन-रोधी दवाओं का स्टॉक करने को कहा है, जो थायरॉयड कैंसर को रोकने में मदद करती हैं।

  • हेल्थ केयर ट्रेनिंग: युद्ध प्रभावित क्षेत्रों और पड़ोसी देशों के डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को रेडिएशन से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।

  • रेडिएशन मॉनिटरिंग: वैश्विक स्तर पर हवा और पानी में रेडिएशन के स्तर को मापने के लिए सेंसर नेटवर्क को सक्रिय किया गया है।


2. परमाणु रेडिएशन का 'डरावना सच'

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि परमाणु घटना होती है, तो इसके परिणाम तत्काल और दीर्घकालिक दोनों होंगे:

  • तत्काल प्रभाव: अत्यधिक गर्मी, ब्लास्ट और तीव्र रेडिएशन से लाखों मौतें और 'एक्यूट रेडिएशन सिंड्रोम' (ARS)।

  • दीर्घकालिक प्रभाव: कैंसर के मामलों में बेतहाशा वृद्धि, आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders) और मिट्टी-पानी का दशकों तक जहरीला हो जाना।

  • खाद्य श्रृंखला पर असर: रेडिएशन के कारण फसलों और पशुओं के जरिए यह इंसानी शरीर में प्रवेश करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी प्रभावित होंगी।


3. वैश्विक स्तर पर बढ़ती बेचैनी

ईरान की परमाणु सुविधाओं और इजरायल की जवाबी कार्रवाई की धमकियों ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है।

  • यूरोपीय देश अलर्ट पर: पोलैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों ने अपने नागरिकों को आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

  • बंकरों की मांग: कई विकसित देशों में परमाणु बंकरों (Nuclear Bunkers) के निर्माण और सर्वाइवल किट की मांग में भारी उछाल देखा गया है।