भारत पर कितना है कर्ज और कौन सा देश है दुनिया का 'उधार किंग'?
भारत अपनी विकास योजनाओं के लिए मुख्य रूप से घरेलू स्रोतों से कर्ज लेता है और फिलहाल भारत पर कुल कर्ज लगभग ₹214.82 लाख करोड़ होने का अनुमान है।
क्या भारत भी लेता है कर्ज? जानें किस देश पर है सबसे ज्यादा उधार
दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद, भारत अपनी विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे के निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए कर्ज का सहारा लेता है। अक्सर आम नागरिक के मन में यह सवाल आता है कि क्या भारत जैसे बड़े देश को भी उधार लेने की ज़रूरत है? इसका जवाब 'हाँ' है, और यह किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की एक सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है।
भारत के कर्ज की वर्तमान स्थिति
वर्ष 2026 के ताजा आर्थिक आंकड़ों और बजट अनुमानों के अनुसार, भारत सरकार का कुल कर्ज (आंतरिक और विदेशी दोनों मिलाकर) लगभग ₹214.82 लाख करोड़ होने का अनुमान है। यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि भारत का अधिकांश कर्ज बाहरी देशों से नहीं, बल्कि अपने ही देश के बाज़ार से लिया गया है।
भारत के कुल कर्ज का लगभग 95% हिस्सा आंतरिक कर्ज है। इसका मतलब है कि सरकार ने यह पैसा देश के भीतर बैंकों, बीमा कंपनियों और आम नागरिकों (सरकारी बॉन्ड्स के माध्यम से) से लिया है। वहीं, भारत का विदेशी कर्ज लगभग $765 अरब के करीब है। भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) फिलहाल 55.6% के आसपास है, जिसे आर्थिक दृष्टि से स्थिर माना जाता है।
दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार: अमेरिका
यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार भी है। अमेरिका पर कुल विदेशी कर्ज का बोझ $30 ट्रिलियन (लाख करोड़ डॉलर) से भी अधिक है। अमेरिका के बाद यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस, और जर्मनी जैसे विकसित देश इस सूची में सबसे ऊपर आते हैं।
जापान भी कर्ज के मामले में बहुत आगे है, लेकिन अमेरिका की तरह उसका कर्ज भी उसकी वैश्विक साख और डॉलर की मज़बूती के कारण संकट का कारण नहीं बनता। विकसित देशों का कर्ज उनकी जीडीपी के मुकाबले अक्सर 100% से भी ज्यादा होता है, जबकि भारत की स्थिति उनके मुकाबले कहीं बेहतर है।
भारत किससे कर्ज लेता है?
भारत अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए मुख्य रूप से तीन स्रोतों से उधार लेता है:
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बहुपक्षीय संस्थाएं: इसमें विश्व बैंक (World Bank) और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे संस्थान शामिल हैं जो कम ब्याज पर लंबी अवधि के लिए कर्ज देते हैं।
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द्विपक्षीय समझौते: भारत तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जापान और जर्मनी जैसे देशों से सीधे कर्ज लेता है। (जैसे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जापान से लिया गया कर्ज)।
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बाज़ार ऋण: सरकार सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) और बॉन्ड्स के जरिए निवेशकों से पैसा जुटाती है।
क्या यह कर्ज चिंता का विषय है?
किसी भी देश के लिए कर्ज लेना तब तक बुरा नहीं है जब तक उसका उपयोग उत्पादक कार्यों में हो रहा हो। भारत इस पैसे का इस्तेमाल हाईवे, रेलवे नेटवर्क, डिजिटल इंडिया और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए कर रहा है। साथ ही, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) इतना मज़बूत है कि वह किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट का सामना करने में सक्षम है।
अतः, भारत पर कर्ज ज़रूर है, लेकिन यह देश की प्रगति की रफ्तार को बनाए रखने का एक वित्तीय जरिया मात्र है।
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