5 साल का संकट: भारत की 40% गैस सप्लाई ठप !
कतर के प्रमुख LNG प्लांट में हुई तबाही के बाद कतर ने चेतावनी दी है कि अगले 5 वर्षों तक वैश्विक गैस सप्लाई बाधित रहेगी।
कतर में दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्लांट पर हुए भीषण हमले या तकनीकी तबाही के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मच गया है। कतर सरकार के ताजा बयान ने भारत सहित दुनिया के कई देशों की नींद उड़ा दी है। कतर ने साफ कर दिया है कि इस तबाही का असर अगले 5 सालों तक गैस सप्लाई पर पड़ सकता है।
1. कतर का 'डरावना सच' क्या है?
कतर के ऊर्जा मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि उनके मुख्य गैस एक्सपोर्ट टर्मिनल को इतनी बुरी तरह नुकसान पहुँचा है कि उसे अपनी पुरानी क्षमता पर लौटने में वर्षों लग सकते हैं। कतर ने चेतावनी दी है कि:
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सप्लाई में भारी कटौती: अगले 60 महीनों (5 साल) तक कतर अपने मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरी तरह निभाने की स्थिति में नहीं होगा।
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वैश्विक किल्लत: चूंकि कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में 300% से 500% तक का उछाल आ सकता है।
2. भारत के लिए यह बड़ा झटका क्यों है?
भारत अपनी कुल LNG जरूरत का करीब 40% से 45% हिस्सा अकेले कतर से आयात करता है। * लंबी अवधि का समझौता: हाल ही में भारत ने कतर के साथ 2048 तक के लिए एक बड़ा गैस समझौता किया था। इस तबाही ने उस भरोसे और सप्लाई चेन को तोड़ दिया है।
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बिजली और खाद संकट: भारत में बिजली बनाने और यूरिया (खाद) उत्पादन में भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस का उपयोग होता है। सप्लाई रुकने से खेती और बिजली की कीमतें प्रभावित होंगी।
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CNG और PNG महंगी: शहरों में पाइप से आने वाली रसोई गैस और गाड़ियों में भरने वाली CNG की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका है।
3. भारत के पास अब क्या विकल्प हैं?
इस "डरावने सच" के सामने आने के बाद भारत सरकार अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश में है:
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रूस और अमेरिका की ओर रुख: भारत अब रूस और अमेरिका से स्पॉट मार्केट (तत्काल खरीद) पर गैस खरीदने की कोशिश करेगा, जो काफी महंगी पड़ सकती है।
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घरेलू उत्पादन पर जोर: रिलायंस और ओएनजीसी (ONGC) जैसे घरेलू उत्पादकों से उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया जा सकता है।
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ईरान और यूएई: कतर के पड़ोसी देशों से सीमित मात्रा में गैस आयात की संभावना तलाशी जा रही है।
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