2050 तक 35 लाख ब्रेस्ट कैंसर केस...? डराने वाली रिपोर्ट !
द लैंसेट' की रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़कर 3.5 मिलियन हो जाएंगे, जिससे सालाना 1.4 मिलियन मौतों का खतरा है।
2050 तक दुनिया में होंगे ब्रेस्ट कैंसर के 3.5 मिलियन केस: 'द लैंसेट' की यह स्टडी बेहद डरावनी है
कैंसर की दुनिया में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) एक ऐसा नाम बन चुका है जो हर साल लाखों परिवारों को अपनी चपेट में ले रहा है। हाल ही में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल्स में से एक, 'द लैंसेट' (The Lancet Oncology) द्वारा प्रकाशित एक नई स्टडी ने भविष्य की जो तस्वीर दिखाई है, वह बेहद चिंताजनक है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों में बड़े बदलाव नहीं किए गए, तो साल 2050 तक ब्रेस्ट कैंसर एक महामारी का रूप ले सकता है।
भविष्य का डरावना आंकड़ा: क्या कहती है रिपोर्ट?
द लैंसेट की 'ब्रेस्ट कैंसर कमीशन' रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 2.3 मिलियन मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या बढ़कर 3.5 मिलियन प्रति वर्ष हो जाएगी।
सिर्फ मामले ही नहीं, बल्कि इस बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी डराने वाला है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2050 तक सालाना 1.4 मिलियन (14 लाख) महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हो सकती है, जो मौजूदा स्थिति से लगभग 44% ज्यादा है।
भारत के लिए खतरे की घंटी
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है। रिपोर्ट के कुछ चौंकाने वाले तथ्य यहाँ दिए गए हैं:
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तेजी से बढ़ता बोझ: 1990 से 2019 के बीच भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में 477% की भारी वृद्धि देखी गई है।
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मौतों का बढ़ता ग्राफ: इसी अवधि के दौरान, इस बीमारी से होने वाली मौतों में 352% का इजाफा हुआ है।
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देर से पहचान: भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश मामले तीसरे या चौथे स्टेज पर अस्पताल पहुँचते हैं, जहाँ इलाज की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

मामले बढ़ने के 6 मुख्य कारण
विशेषज्ञों ने इस उछाल के पीछे मुख्य रूप से आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़े 6 कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:
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मोटापा (High BMI): शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता वजन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
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गलत खान-पान: प्रोसेस्ड फूड, अधिक शुगर और रेड मीट का सेवन।
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नशा: महिलाओं में शराब और तंबाकू के बढ़ते सेवन ने जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है।
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मेटाबॉलिक स्वास्थ्य: हाई ब्लड शुगर और डायबिटीज का कैंसर के साथ सीधा संबंध पाया गया है।
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प्रजनन कारकों में बदलाव: देर से शादी, देर से गर्भधारण और स्तनपान (Breastfeeding) न कराना।
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पर्यावरण प्रदूषण: बढ़ता वायु प्रदूषण और प्लास्टिक में मौजूद हानिकारक केमिकल्स।
समाधान: इस संकट को कैसे रोकें?
रिपोर्ट केवल डराती नहीं है, बल्कि यह समाधान की राह भी दिखाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम आज सचेत हो जाएं, तो इन मौतों को टाला जा सकता है:
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जल्दी पहचान (Early Detection): 40 की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित तौर पर मैमोग्राफी करवानी चाहिए।
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सेल्फ एग्जामिनेशन: हर महिला को महीने में एक बार स्वयं स्तन की जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी गांठ का पता शुरुआती दौर में चल सके।
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इलाज तक समान पहुंच: गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सस्ते और सुलभ इलाज की व्यवस्था करना अनिवार्य है।
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जागरूकता अभियान: ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े सामाजिक 'टैबू' (शर्म) को तोड़ना होगा ताकि महिलाएं खुलकर अपनी समस्या बता सकें।
2050 का यह आंकड़ा एक 'अलार्म' की तरह है। यह हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है। स्तन कैंसर के लक्षणों—जैसे स्तन में गांठ, आकार में बदलाव या त्वचा में असामान्यता—को कभी नजरअंदाज न करें।
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