1972 के बाद पहली बार चांद के करीब पहुंचेंगे इंसान:नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च !
नासा का आर्टेमिस-II मिशन 1972 के बाद पहली बार चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के करीब ले जाने के लिए सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है।
अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास: 1972 के बाद पहली बार चांद की दहलीज पर इंसान
मानव जाति के अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के इतिहास में आज एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-II (Artemis-II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। साल 1972 में 'अपोलो 17' मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा को छोड़कर चंद्रमा के इतने करीब पहुंचने जा रहा है।
यह मिशन न केवल तकनीक का प्रदर्शन है, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) पर मानव बस्तियां बसाने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है।
क्या है आर्टेमिस-II मिशन?
आर्टेमिस-II नासा का वह मिशन है जिसमें 4 अंतरिक्ष यात्री ओरियन (Orion) स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर चंद्रमा की यात्रा पर निकले हैं।
-
मिशन की अवधि: 10 दिन।
-
दूरी: यह यान चंद्रमा के चारों ओर एक चक्कर लगाएगा और पृथ्वी पर वापस लौट आएगा।
-
उद्देश्य: चंद्रमा की सतह पर उतरने से पहले अंतरिक्ष यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम और मानव सुरक्षा मानकों की जांच करना।
मिलिए उन 4 नायकों से, जो इतिहास रचने निकले हैं
इस मिशन की सबसे खास बात इसकी विविधता है। आर्टेमिस-II के चालक दल में पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री को शामिल किया गया है:
-
रीड वाइसमैन (Reid Wiseman): मिशन कमांडर।
-
विक्टर ग्लोवर (Victor Glover): पायलट (चंद्रमा मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति)।
-
क्रिस्टीना कोच (Christina Koch): मिशन स्पेशलिस्ट (चंद्रमा के करीब पहुंचने वाली पहली महिला)।
-
जेरेमी हेन्सन (Jeremy Hansen): मिशन स्पेशलिस्ट (कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के यात्री)।
मिशन का पूरा सफर: कैसे होगा 10 दिनों का रोमांच?
आर्टेमिस-II मिशन का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण और वैज्ञानिक बारीकियों से भरा है:
-
लॉन्चिंग: दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट SLS (Space Launch System) के जरिए यान को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया।
-
चंद्रमा का चक्कर: ओरियन यान चंद्रमा के 'फॉर साइड' (पीछे वाले हिस्से) से होकर गुजरेगा, जो पृथ्वी से लगभग 3.7 लाख किलोमीटर दूर है।
-
वापसी (Splashdown): 10 दिनों की यात्रा के बाद, यान प्रशांत महासागर में पैराशूट के जरिए सुरक्षित लैंडिंग करेगा।
1972 से अब तक: इतना लंबा वक्त क्यों लगा?
नासा के अंतिम चंद्रमा मिशन 'अपोलो 17' के बाद दशकों तक ध्यान पृथ्वी की निचली कक्षा (ISS) और मंगल के रोबोटिक मिशनों पर रहा। अब आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए नासा का लक्ष्य चंद्रमा पर केवल जाना नहीं, बल्कि वहां एक स्थायी बेस (Lunar Base) बनाना है। आर्टेमिस-II की सफलता के बाद आर्टेमिस-III मिशन लॉन्च होगा, जिसमें इंसान फिर से चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा।
मंगल की राह चांद से होकर
आर्टेमिस-II मिशन की सफलता भारत के 'चंद्रयान' और अन्य देशों के मून मिशनों के लिए भी प्रेरणा है। यह साबित करता है कि इंसान एक बार फिर सितारों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए तैयार है। चंद्रमा अब केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को सुलझाने का हमारा अगला 'स्टॉप' बनने जा रहा है।
Matrimonial

BRG News 


