मानसून की रफ्तार पर ब्रेक: तेलंगाना में 6 और अरब सागर में 8 दिन से ठहरा मानसून !

केरल में समय से पहले एंट्री के बाद अचानक थमी मानसून की चाल! अरब सागर में पिछले 8 दिनों से एक ही जगह अटके हैं बादल। गर्मी और उमस से राहत के लिए करना होगा थोड़ा और इंतजार।

मानसून की रफ्तार पर ब्रेक: तेलंगाना में 6 और अरब सागर में 8 दिन से ठहरा मानसून !

भीषण गर्मी और उमस से परेशान देश के बड़े हिस्से के लिए मानसून को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) की रफ्तार अचानक पूरी तरह थम गई है। अरब सागर (Arabian Sea) के ऊपर मानसून पिछले 8 दिनों से एक ही जगह पर अटका हुआ है, जिससे मध्य और उत्तर भारत में इसके पहुंचने का इंतजार और लंबा हो गया है।

इस रुकावट के कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों और गुजरात में मानसून की एंट्री टल गई है। आइए जानते हैं मौसम विभाग के इस ताजा अपडेट के पीछे की वजहें और राहत की उम्मीद कब तक है:

8 दिनों का गतिरोध: कहां और क्यों थमा मानसून?

मानसून ने इस साल समय से पहले केरल में दस्तक देकर अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन जून के दूसरे हफ्ते में आते ही इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई।

  • अरब सागर में ब्रेक: मानसून की जो शाखा महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ बढ़ती है, वह अरब सागर के ऊपर पिछले 8 दिनों से आगे नहीं खिसक सकी है।

  • तेलंगाना में भी 6 दिन से अटका: सिर्फ अरब सागर ही नहीं, बल्कि बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ने वाली मानसून की दूसरी शाखा भी तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में पिछले 6 दिनों से ठहरी हुई है।

  • अटकने की मुख्य वजह: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान में समुद्री हवाओं का सिस्टम (Wind Pattern) काफी कमजोर पड़ गया है। मानसून को आगे धकेलने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर हैं, जिसके कारण बादलों को आगे बढ़ने की गति नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा, उत्तर और मध्य भारत से आ रही गर्म और शुष्क हवाओं (लू) ने भी मानसून के बादलों को आगे बढ़ने से रोक रखा है।

किन राज्यों पर पड़ेगा सीधा असर?

मानसून की इस सुस्ती का सबसे बड़ा असर मध्य और पश्चिमी भारत के राज्यों पर देखने को मिल रहा है:

  • मध्य प्रदेश (MP): आमतौर पर एमपी में मानसून 15 से 17 जून के बीच प्रवेश कर जाता है। लेकिन इस रुकावट के कारण अब मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री में कम से कम 5 दिन की और देरी हो सकती है। अब इसके 21-22 जून तक पहुंचने की संभावना है।

  • महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़: मुंबई और कोंकण क्षेत्र में पहुंचने के बाद मानसून महाराष्ट्र के आंतरिक इलाकों (जैसे विदर्भ और मराठवाड़ा) और छत्तीसगढ़ में आगे नहीं बढ़ पाया है। जब अरब सागर में हलचल बढ़ेगी, तभी इन राज्यों में मानसून आगे का सफर तय करेगा।

  • गुजरात: गुजरात के दक्षिणी हिस्सों में भी मानसून की आमद रुक गई है, जिससे वहां के किसानों का इंतजार बढ़ गया है।

राहत कब तक? मौसम विभाग का अनुमान

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों तक मानसून की स्थिति में कोई बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि, इसके बाद हवाओं का रुख बदलने और एक नया सिस्टम बनने की उम्मीद है।

प्री-मानसून से मिलेगी थोड़ी राहत भले ही आधिकारिक मानसून अटक गया हो, लेकिन लोकल सिस्टम और चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और हल्की बौछारें पड़ने (Pre-Monsoon Rain) का दौर जारी रहेगा। इससे तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन उमस काफी बढ़ जाएगी।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि वे खरीफ की फसलों (जैसे सोयाबीन, मक्का, कपास और धान) की बोनी (Sowing) करने में जल्दबाजी न करें। जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय न हो जाए और लगातार 2-3 दिन अच्छी बारिश न हो, तब तक बोनी करने से बचें, अन्यथा बीज खराब होने के कारण दोबारा बोनी का खर्च उठाना पड़ सकता है।