भारत में इबोला अलर्ट;हाई-रिस्क देशों से आने वालों पर सख्ती !
सरकार ने हाई-रिस्क देशों से आने वाले यात्रियों के लिए इबोला वायरस को लेकर सख्त एडवाइजरी और 21 दिनों की निगरानी का नियम जारी किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैले इबोला वायरस के प्रकोप को 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाई-रिस्क वाले देशों से आने वाले यात्रियों के लिए सख्त दिशानिर्देश और एडवाइजरी जारी की है।
यहाँ इस पूरे मामले से जुड़ी मुख्य बातें और गाइडलाइंस दी गई हैं:
किन देशों के यात्रियों पर विशेष नजर है?
स्वास्थ्य मंत्रालय की संस्था एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (APHO) ने मुख्य रूप से तीन हाई-रिस्क (उच्च जोखिम वाले) देशों से आने वाले या वहां से होकर गुजरने वाले (ट्रांजिट) यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है:
-
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC)
-
युगांडा
-
दक्षिण सूडान
राहत की बात: स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, भारत में अभी तक इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह सभी कदम एहतियात के तौर पर उठाए जा रहे हैं।
क्या हैं नए नियम और एडवाइजरी?
-
इमिग्रेशन से पहले रिपोर्टिंग: अगर कोई यात्री पिछले 21 दिनों के भीतर प्रभावित देशों में रहा है, या किसी संदिग्ध/पुष्टि वाले इबोला मरीज के सीधे संपर्क (खून या शारीरिक तरल पदार्थ) में आया है, तो उसे इमिग्रेशन क्लियरेंस से पहले एयरपोर्ट के हेल्थ डेस्क पर इसकी जानकारी देनी होगी।
-
21 दिनों की निगरानी (Self-Monitoring): इबोला वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड (लक्षण दिखने का समय) 2 से 21 दिन का होता है। इसलिए, प्रभावित देशों से लौटने वाले यात्रियों को भारत आने के बाद अगले 21 दिनों तक अपने स्वास्थ्य पर कड़ी नजर रखनी होगी।
-
तत्काल चिकित्सा सहायता: यदि इन 21 दिनों के भीतर बुखार या कोई अन्य लक्षण दिखाई देता है, तो यात्री को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना होगा और अपनी ट्रैवल हिस्ट्री (यात्रा का विवरण) साझा करनी होगी।
इबोला के मुख्य लक्षण जिन्हें पहचानना जरूरी है
अगर प्रभावित देशों से लौटने के बाद 21 दिनों के भीतर नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो सतर्क हो जाएं:
-
तेज बुखार और कमजोरी
-
सिरदर्द और मांसपेशियों में गंभीर दर्द
-
गले में खराश
-
उल्टी और दस्त (डायरिया)
-
गंभीर मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव (मसूड़ों, नाक या मल-मूत्र के जरिए खून आना)
जांच और स्क्रीनिंग की तैयारी
मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) साझा की है। एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। यदि कोई संदिग्ध मामला मिलता है, तो संक्रमण की पुष्टि के लिए निम्नलिखित लैब टेस्ट किए जाएंगे:
-
RT-PCR टेस्ट: यह शरीर में वायरस के जेनेटिक मटेरियल (RNA) की पहचान करने वाला सबसे भरोसेमंद टेस्ट है।
-
ELISA टेस्ट: शरीर में वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडी या एंटीजन का पता लगाने के लिए।
-
एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट: वायरस के खास प्रोटीनों की पहचान करने के लिए।
इबोला वायरस कोरोना की तरह हवा (Airborne) से नहीं फैलता है। यह केवल संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसलिए पैनिक (घबराने) की जरूरत नहीं है, केवल सतर्कता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।
Matrimonial

BRG News 


