War Impact: भारतीय मुद्रा का बुरा हाल,रुपया 93 पार !
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिर गया है।
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारतीय मुद्रा, रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। 20 मार्च 2026 को भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93 के ऐतिहासिक निचले स्तर को पार कर गया।
1. रिकॉर्ड गिरावट के मुख्य आंकड़े
पिछले कुछ दिनों में रुपये ने लगातार कई मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़े हैं:
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ताज़ा स्तर: शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 93.12 से 93.15 के स्तर तक लुढ़क गया।
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पिछला रिकॉर्ड: बुधवार को यह 92.63 पर बंद हुआ था (गुरुवार को गुड़ी पड़वा के कारण बाजार बंद था)।
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कुल गिरावट: मध्य पूर्व में तनाव शुरू होने के बाद से रुपया लगभग 2% से अधिक कमजोर हो चुका है।
2. क्यों गिर रहा है रुपया? (प्रमुख कारण)
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये के "ताश के पत्तों की तरह" गिरने के पीछे तीन सबसे बड़े कारण हैं:
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कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने का डर है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।
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विदेशी निवेशकों (FIIs) का पलायन: वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना और अमेरिकी डॉलर) की ओर भाग रहे हैं। मार्च 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 8 अरब डॉलर ($8 Billion) की निकासी की है।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट: युद्ध के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में 'पैनिक' (घबराहट) पैदा कर दी है।
3. अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर
रुपये के 93 के पार जाने का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा:
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महंगाई में बढ़ोतरी: आयात महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
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इलेक्ट्रॉनिक सामान: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम बढ़ सकते हैं।
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विदेश यात्रा और शिक्षा: विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों का खर्च बढ़ जाएगा और विदेश घूमना भी महंगा होगा।
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व्यापार घाटा: भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका है, जो जीडीपी ग्रोथ को धीमा कर सकता है।
4. क्या कर रहा है RBI?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्थिति को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया है। आरबीआई ने रुपये की गिरावट की रफ्तार को कम करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिक्री की है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, रुपये पर दबाव बना रहेगा।
अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें $125 के पार जाती हैं, तो रुपया 94-95 के स्तर को भी छू सकता है।
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