भारतीयों को लगेगा बड़ा झटका ! अमेरिकी संसद में H-1B वीजा बंद करने का प्रस्ताव ...

H-1B Visa in Jeopardy: New legislation seeks to bring the visa cap to zero by FY 2027.

भारतीयों को लगेगा बड़ा झटका ! अमेरिकी संसद में H-1B वीजा बंद करने का प्रस्ताव ...

H-1B वीजा पर बड़ा संकट: अमेरिकी संसद में प्रोग्राम खत्म करने का बिल पेश, 2027 तक का है टारगेट

भारतीय आईटी सेक्टर और अमेरिका में नौकरी करने वाले लाखों भारतीयों के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। अमेरिकी सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने 'Ending Exploitative Imported Labor Exemptions Act' (EXILE Act) पेश किया है। यदि यह बिल कानून बनता है, तो वित्तीय वर्ष 2027 तक H-1B वीजा को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

क्या है 'EXILE Act' और इसके मुख्य बिंदु?

इस बिल का उद्देश्य अमेरिकी आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (Immigration and Nationality Act) में संशोधन करना है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • शून्य कोटा (Zero Cap): वित्त वर्ष 2027 से H-1B वीजा की संख्या को घटाकर 'शून्य' करने का प्रस्ताव है।

  • अमेरिकी नौकरियों का तर्क: बिल पेश करने वाले सांसदों का दावा है कि कंपनियां अमेरिकी श्रमिकों के बजाय सस्ते विदेशी श्रम को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्थानीय युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

  • बड़े कॉर्पोरेट्स पर निशाना: बिल में डिज्नी, माइक्रोसॉफ्ट और फेडेक्स जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर H-1B कर्मचारियों के लिए अमेरिकी वर्कर्स की छंटनी की।

भारतीयों पर क्यों होगा सबसे ज्यादा असर?

H-1B वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलता है।

  • वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 80% से अधिक H-1B वीजा भारतीय और चीनी नागरिकों को मिलते हैं।

  • इनमें से 70% से ज्यादा केवल भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स होते हैं।

  • वीजा खत्म होने की स्थिति में भारतीय टेक कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro) के बिजनेस मॉडल और अमेरिका में रह रहे हजारों परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा।

अभी की स्थिति क्या है?

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फिलहाल यह केवल एक 'बिल' (विधेयक) है। इसे कानून बनने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट, दोनों से पास होना होगा और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी। अमेरिका में टेक दिग्गज और बिजनेस ग्रुप्स अक्सर इस तरह के बिलों का विरोध करते हैं क्योंकि वे विदेशी टैलेंट पर निर्भर हैं।