गुजरात विधानसभा में बड़ा खुलासा, पिछले 25 महीनों में 314 शेरों की मौत !

गुजरात विधानसभा में सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि पिछले 25 महीनों में 314 शेरों की मौत हुई है। इनमें 148 तो मासूम शावक थे। प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ 'अप्राकृतिक' मौतें भी चिंता बढ़ा रही हैं।

गुजरात विधानसभा में बड़ा खुलासा, पिछले 25 महीनों में 314 शेरों की मौत !

गुजरात में शेरों की सुरक्षा पर संकट? पिछले 25 महीनों में 314 शेरों की मौत, सरकार ने विधानसभा में पेश किए आंकड़े

गांधीनगर: गुजरात की शान माने जाने वाले 'एशियाई शेरों' (Asiatic Lions) को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि राज्य में पिछले मात्र 25 महीनों में कुल 314 शेरों की मृत्यु हुई है। कांग्रेस विधायक शैलेश परमार द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने यह विस्तृत जानकारी साझा की।

25 महीनों का लेखा-जोखा: मौत के आंकड़े डराने वाले

सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से लेकर 31 जनवरी 2026 तक की स्थिति के मुताबिक राज्य में शेरों की मृत्यु का आंकड़ा 300 के पार निकल गया है।

मृत्यु का विवरण:

  • कुल मौतें: 314

  • नर शेर (Lions): 75

  • शेरनी (Lioness): 91

  • शावक (Cubs): 148 (सबसे अधिक मृत्यु दर शावकों में देखी गई है)


वर्तमान में शेरों की कुल आबादी

31 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, गुजरात सरकार के रिकॉर्ड में राज्य में कुल 911 शेर दर्ज हैं। इसमें शामिल हैं:

  • नर शेर: 255

  • शेरनी: 405

  • शावक: 231

विशेषज्ञों का कहना है कि शेरों की संख्या में वृद्धि तो हो रही है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौतों का होना, विशेषकर शावकों की मृत्यु, भविष्य के लिए एक चुनौती बन सकता है।


सरकार का पक्ष और सुरक्षा उपाय

वन विभाग ने सदन को आश्वस्त किया है कि शेरों के संरक्षण और उनके स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। सरकार ने शेरों की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कदमों का उल्लेख किया:

  1. स्वास्थ्य निगरानी: बीमार या घायल शेरों के त्वरित उपचार के लिए लायन एम्बुलेंस और रेस्क्यू सेंटर को सक्रिय रखा गया है।

  2. इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और जेनेटिक रिसर्च: शेरों की नस्ल को बीमारियों से बचाने के लिए वैज्ञानिक प्रयास।

  3. मानव-वन्यजीव संघर्ष: रिहायशी इलाकों में शेरों के आने से होने वाले संघर्ष को रोकने के लिए 'वन मित्र' और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग।

  4. जांच: हर मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम और कारणों की विस्तृत जांच की जाती है ताकि अप्राकृतिक मौतों को न्यूनतम किया जा सके।

"शेरों की बढ़ती संख्या हमारे सफल संरक्षण प्रयासों का प्रमाण है, लेकिन हर मृत्यु हमारे लिए गंभीर विषय है। हम अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए बुनियादी ढांचे और सुरक्षा घेरे को और मजबूत कर रहे हैं।"वन विभाग, गुजरात सरकार