कैसे बनता है कोई पासपोर्ट 'सुपरपावर' ?

जानें वो 5 बड़े कारण जो तय करते हैं कि आप बिना वीजा के दुनिया घूम पाएंगे या नहीं। भारत की रैंकिंग में सुधार के पीछे क्या है बड़ी वजह? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें!

कैसे बनता है कोई पासपोर्ट 'सुपरपावर' ?

किसी भी देश का पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह उस देश की वैश्विक साख और कूटनीतिक शक्ति का प्रतीक होता है। आपने अक्सर सुना होगा कि 'हेनले पासपोर्ट इंडेक्स' (Henley Passport Index) में अमुक देश नंबर 1 पर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रैंकिंग आखिर तय कैसे होती है?

यहाँ विस्तार से बताया गया है कि पासपोर्ट की ताकत कैसे मापी जाती है और इसमें कौन-कौन से कारक अहम भूमिका निभाते हैं:


1. मुख्य आधार: वीजा-फ्री एक्सेस (Visa-Free Access)

पासपोर्ट रैंकिंग तय करने का सबसे बड़ा और प्राथमिक पैमाना यह है कि उस देश का नागरिक बिना पूर्व वीजा (Prior Visa) के कितने देशों में जा सकता है। इसमें तीन स्थितियाँ शामिल होती हैं:

  • वीजा-फ्री एंट्री: जहाँ आपको पासपोर्ट के अलावा किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं।

  • वीजा-ऑन-अराइवल: जहाँ गंतव्य देश पहुँचने पर आपको वीजा मिल जाता है।

  • ई-वीजा (e-Visa) या ETA: जहाँ ऑनलाइन छोटा सा फॉर्म भरकर मंजूरी मिल जाती है।

जितने अधिक देशों में यह सुविधा होगी, उस देश का पासपोर्ट उतना ही 'शक्तिशाली' माना जाएगा।


2. अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) का डेटा

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स जैसे बड़े संस्थान अपना डेटा IATA से लेते हैं। IATA दुनिया भर के एयरलाइनों और यात्रा गंतव्यों का सबसे सटीक और बड़ा डेटाबेस रखता है। हर साल या हर तिमाही में इस डेटा का विश्लेषण किया जाता है कि किस देश ने किस देश के लिए अपनी वीजा नीतियां बदली हैं।


3. कूटनीतिक संबंध (Diplomatic Relations)

पासपोर्ट की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि उस देश के बाकी देशों के साथ संबंध कैसे हैं।

  • अगर दो देशों के बीच मजबूत व्यापारिक और कूटनीतिक संधि है, तो वे एक-दूसरे के नागरिकों के लिए वीजा नियमों में ढील देते हैं।

  • सॉफ्ट पावर: किसी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि (Global Image) जितनी बेहतर होगी, दूसरे देश उसके नागरिकों को उतनी ही आसानी से आने की अनुमति देंगे।


4. देश की आर्थिक स्थिति और सुरक्षा

रैकिंग तय करते समय परोक्ष रूप से ये चीजें भी प्रभाव डालती हैं:

  • GDP और स्थिरता: अमीर और स्थिर देशों के नागरिकों को 'कम जोखिम वाला' (Low-risk) माना जाता है। अन्य देशों को डर नहीं होता कि ये लोग अवैध रूप से वहां बस जाएंगे।

  • सुरक्षा मानक: जिस देश के पासपोर्ट में सुरक्षा फीचर्स (जैसे बायोमेट्रिक्स) मजबूत होते हैं और जिसे जाली बनाना मुश्किल होता है, उसकी विश्वसनीयता अधिक होती है।


5. भारत की वर्तमान स्थिति (2026)

फरवरी 2026 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट ने अपनी स्थिति में सुधार किया है।

  • रैंकिंग: भारत वर्तमान में 75वें स्थान पर है (जो 2025 में 81वें या 85वें स्थान के आसपास था)।

  • पहुँच: भारतीय पासपोर्ट धारक अब लगभग 56 से 59 देशों में बिना पूर्व वीजा के यात्रा कर सकते हैं।


पासपोर्ट रैंकिंग पूरी तरह से 'मोबिलिटी' (Mobility) यानी आवाजाही की सुगमता पर टिकी होती है। जिस देश का नागरिक जितनी कम कागजी कार्रवाई के साथ दुनिया घूम सकता है, उस देश का पासपोर्ट उतना ही ताकतवर कहलाता है। सिंगापुर, जापान और जर्मनी जैसे देश अक्सर इस सूची में शीर्ष पर रहते हैं क्योंकि उनके संबंध लगभग पूरी दुनिया के साथ बेहतरीन हैं।