24 साल बाद बड़ा उलटफेर: पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम को मिली राहत !
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 24 साल पुराने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया है। सीबीआई की निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द करना जांच एजेंसी के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
7 मार्च, 2026 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 2002 के बहुचर्चित राम चंदर छत्रपति हत्याकांड में बरी कर दिया है। यह फैसला सीबीआई (CBI) के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि 2019 में विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट का मुख्य फैसला
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दोषसिद्धि रद्द: मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने राम रहीम की अपील स्वीकार करते हुए उनकी सजा को रद्द कर दिया और उन्हें आरोपों से मुक्त (Acquit) कर दिया।
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अन्य दोषियों की स्थिति: जहाँ राम रहीम को राहत मिली है, वहीं कोर्ट ने इस मामले के दो अन्य सह-आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है।
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कारण: विस्तृत फैसला अभी प्रतीक्षित है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर अदालत ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों और साजिश के दावों को राम रहीम के खिलाफ पर्याप्त नहीं माना।
क्या था मामला? (इतिहास)
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हत्या का कारण: पत्रकार राम चंदर छत्रपति ने अपने अखबार 'पूरा सच' में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
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वारदात: 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा में उनके घर के बाहर उन्हें गोली मार दी गई थी, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।
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CBI जांच: 2003 में पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति की याचिका पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। 2019 में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया था।
बड़ा सवाल: क्या राम रहीम जेल से बाहर आएंगे?
नहीं। बरी होने के बावजूद राम रहीम जेल में ही रहेंगे क्योंकि:
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वह दो साध्वियों के साथ बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं।
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मई 2024 में उन्हें पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्याकांड में भी हाई कोर्ट से बरी कर दिया गया था, लेकिन बलात्कार की सजा अभी भी लागू है।
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वर्तमान में वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।
पीड़ित परिवार का पक्ष
पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस फैसले को "बेहद निराशाजनक" बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे हार नहीं मानेंगे और इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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