साउथ अफ्रीका में क्यों भड़की विदेशियों के खिलाफ हिंसा? 25 हजार से ज्यादा का पलायन !

दक्षिण अफ्रीका में हालात बेकाबू हो गए हैं। स्थानीय लोग अप्रवासियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। पहाड़ों और रिफ्यूजी कैंपों में छिपकर जान बचा रहे हैं लोग।

साउथ अफ्रीका में क्यों भड़की विदेशियों के खिलाफ हिंसा? 25 हजार से ज्यादा का पलायन !

साउथ अफ्रीका में जेनोफोबिया का खौफ: लाठी लेकर विदेशियों को खोज रहे स्थानीय !

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में एक बार फिर विदेशी नागरिकों के खिलाफ हिंसा और नफरत (Xenophobia) का माहौल गहरा गया है। देश के कई हिस्सों में स्थानीय लोग लाठी-डंडों और पारंपरिक हथियारों के साथ सड़कों पर उतर आए हैं और विदेशियों को निशाना बना रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि खौफ के साए में जी रहे करीब 25,000 विदेशी नागरिक अब तक देश छोड़कर भाग चुके हैं या पलायन को मजबूर हैं।

क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?

दक्षिण अफ्रीका में 'मार्च एंड मार्च' (March and March) जैसे कुछ स्थानीय अप्रवासी-विरोधी संगठनों ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को देश छोड़ने के लिए 30 जून 2026 का अल्टीमेटम दिया था।

स्थानीय लोगों का मानना है कि विदेशी नागरिकों की वजह से देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी के चलते चरमपंथी समूहों ने यह चेतावनी दी थी कि अगर 30 जून तक विदेशी देश छोड़कर नहीं गए, तो उन्हें गंभीर अंजाम भुगतने होंगे। इस डेडलाइन के करीब आते ही हिंसा भड़क उठी।

लाठी-डंडों के साथ घर-घर तलाशी

  • खौफनाक मंजर: कई तटीय शहरों और प्रमुख कस्बों में भीड़ लाठी और डंडे लेकर घर-घर जा रही है और विदेशियों को खोज-खोज कर बाहर निकाल रही है।

  • पहचान पर हमला: हमलावरों की भीड़ यह नहीं देख रही कि किसके पास वैध दस्तावेज (Visa/Passport) हैं और कौन अवैध है। सिर्फ बाहरी होने के संदेह मात्र पर लोगों को पीटा जा रहा है।

  • पहाड़ों और कैंपों में शरण: मोजाम्बिक, मलावी, नाइजीरिया और घाना जैसे देशों के नागरिक अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ों, कम्युनिटी हॉल और राहत शिविरों में छिपने को मजबूर हैं।

25 हजार से ज्यादा लोगों का पलायन

  • अल्टीमेटम के खौफ और लगातार हो रहे हमलों के कारण अब तक 25,000 से ज्यादा विदेशी नागरिक दक्षिण अफ्रीका छोड़ चुके हैं।

  • कई अफ्रीकी देश अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन और चार्टर्ड फ्लाइट्स की व्यवस्था कर रहे हैं।

  • ट्रांजिट कैंपों और डिपोर्टेशन सेंटर्स पर भारी भीड़ जमा हो गई है, जिससे वहां मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) पैदा हो गया है।

सेना और पुलिस हाई अलर्ट पर

हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को तैनात किया है:

  • पुलिस और सेना की तैनाती: कार्यवाहक पुलिस मंत्री और रक्षा मंत्री ने पूरे देश में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी है। इसके अलावा सेना को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि प्रमुख हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा की जा सके।

  • सरकार की अपील: राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और अन्य अधिकारियों ने नागरिकों से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अर्थव्यवस्था को ठप करने या हिंसा फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

दक्षिण अफ्रीका में विदेशियों पर हमलों (Xenophobia) का यह कोई पहला मामला नहीं है। 2008, 2015 और 2019 में भी इस तरह की भीषण हिंसा हो चुकी है। लेकिन इस बार 30 जून की डेडलाइन और बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार इस बढ़ते संकट को कैसे काबू में करती है।