राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों का केस लड़ने से अयोध्या के वकीलों ने किया साफ इनकार !
राम मंदिर के दानपात्र से चोरी और गबन के मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि वे इन आरोपियों की तरफ से अदालत में कोई पैरवी नहीं करेंगे।
अयोध्या के वकीलों का बड़ा फैसला: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेंगे
राम मंदिर के चढ़ावे (दान) में कथित गबन और चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं। अयोध्या (फैजाबाद) के वकीलों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि वे इस मामले में गिरफ्तार किसी भी आरोपी का केस नहीं लड़ेंगे। वकीलों का स्पष्ट कहना है कि इस घटना से करोड़ों सनातनियों और उनकी खुद की धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
फैजाबाद बार एसोसिएशन की ओर से इस संबंध में सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है और सोमवार (29 जून) को होने वाली आम सभा की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।
आस्था को पहुंची चोट, वकीलों में भारी आक्रोश
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने स्थानीय लोगों और कानूनी जानकारों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा और सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि मंदिर के चढ़ावे की चोरी की घटना से सभी वकील आहत हैं।
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कड़ी कार्रवाई की मांग: कई वरिष्ठ वकीलों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि चंद लोगों की हरकतों से पूरी दुनिया में अयोध्या की छवि खराब हुई है और इन आरोपियों के खिलाफ 'बुलडोजर नीति' के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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गुपचुप पेशी पर ऐतराज: कुछ वकीलों ने पुलिस द्वारा आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने पर भी नाराजगी जताई है। उनका मानना है कि ऐसे सामाजिक अपराधियों को पहले जनता के सामने लाया जाना चाहिए था।
कौन हैं आरोपी और अब तक क्या हुई कार्रवाई?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है:
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गिरफ्तार आरोपी: इनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। ये सभी राम मंदिर में दानपात्र से निकलने वाले कैश और चढ़ावे की गिनती करने वाली कोर टीम का हिस्सा थे।
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कैश की बरामदगी: पुलिस और SIT की टीमों ने रविवार को स्थानीय मजिस्ट्रेटों की मौजूदगी में आरोपियों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच एजेंसियों ने अब तक लगभग 79.85 लाख रुपये की राशि बरामद की है।
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न्यायिक हिरासत: सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस जल्द ही इनकी कस्टोडियल रिमांड की मांग कर सकती है ताकि और भी खुलासे हो सकें।
2005 में भी वकीलों ने दिखाई थी यही एकजुटता
यह पहली बार नहीं है जब अयोध्या के वकीलों ने किसी हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपियों की पैरवी करने से इनकार किया हो। इससे पहले साल 2005 में, जब राम जन्मभूमि परिसर पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था, तब भी अयोध्या के वकीलों ने एक सुर में आतंकवादियों का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया था।
कानूनी पहलू: हालांकि, भारत के कानून (Legal Services Authorities Act, 1987) के तहत हर आरोपी को कानूनी सहायता का अधिकार है। यदि स्थानीय बार एसोसिएशन आरोपियों की पैरवी नहीं करता है, तो अदालत अन्य जिलों के वकीलों या विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) के माध्यम से उन्हें वकील उपलब्ध करा सकती है।
फिलहाल, अयोध्या में इस मामले को लेकर सरगर्मी तेज है और सबकी निगाहें सोमवार को होने वाली बार एसोसिएशन की बैठक और पुलिस रिमांड पर टिकी हैं।
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