"स्पेस क्वीन" का आखिरी सलाम! सुनीता विलियम्स का 27 साल का सफर खत्म।

"27 साल, 3 बड़े मिशन और कई विश्व रिकॉर्ड! भारतीय मूल की गौरव सुनीता विलियम्स ने नासा से रिटायरमेंट ले लिया है। अंतरिक्ष की दुनिया में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

"स्पेस क्वीन" का आखिरी सलाम! सुनीता विलियम्स का 27 साल का सफर खत्म।

अंतरिक्ष के एक युग का अंत: सुनीता विलियम्स ने नासा से ली विदाई

वाशिंगटन/नई दिल्ली: भारतीय मूल की दिग्गज अंतरिक्ष यात्री और 'स्पेस क्वीन' के नाम से मशहूर सुनीता विलियम्स ने 27 साल की ऐतिहासिक सेवा के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) से आधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्ति ले ली है। नासा के नए प्रशासक जेरेड आइजैकमैन ने इसकी पुष्टि करते हुए उन्हें मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में एक "प्रदर्शक और पथप्रदर्शक" (Trailblazer) बताया।

अंतरिक्ष में बिताए 608 दिन

सुनीता विलियम्स का करियर उपलब्धियों और रिकॉर्ड्स से भरा रहा है। अपने 27 साल के सफर में उन्होंने कुल 3 अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

कुल समय: उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए, जो किसी भी नासा अंतरिक्ष यात्री द्वारा बिताया गया दूसरा सबसे अधिक समय है।

स्पेसवॉक का रिकॉर्ड: सुनीता ने कुल 9 बार अंतरिक्ष की खुली गहराइयों में चहलकदमी (Spacewalk) की। उनका कुल स्पेसवॉक समय 62 घंटे 6 मिनट है, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है।

चुनौतीपूर्ण अंतिम मिशन

सुनीता विलियम्स की अंतिम यात्रा साल 2024 में बोइंग स्टारलाइनर के परीक्षण मिशन के रूप में शुरू हुई थी। हालांकि यह मिशन केवल 8 दिनों का था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उन्हें और उनके साथी बुच विल्मोर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 9 महीनों तक रुकना पड़ा। वह मार्च 2025 में स्पेसएक्स (SpaceX) के यान से सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लौटी थीं।

भारत से गहरा नाता

गुजरात के झुलासन गांव से ताल्लुक रखने वाली सुनीता विलियम्स ने हमेशा अपनी भारतीय जड़ों पर गर्व व्यक्त किया। वे अपने साथ अंतरिक्ष में भगवद्गीता और भगवान गणेश की मूर्ति लेकर गई थीं। रिटायरमेंट के बाद वे फिलहाल भारत दौरे पर हैं, जहां वे युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

"सुनीता विलियम्स ने न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़े सपने देखने का रास्ता भी तैयार किया।" — नासा प्रशासक