शांति और मोक्ष की दहलीज: मणिकर्णिका घाट !
"मणिकर्णिका... यहाँ अंत नहीं, आरंभ होता है। जहाँ दुनिया की सारी इच्छाएं राख बन जाती हैं और सिर्फ एक ही चीज बचती है—शांति।"
मणिकर्णिका घाट: काशी का वो द्वार जहाँ लोग मनोकामना नहीं, 'शांति' माँगते हैं
वाराणसी (काशी): दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक, काशी (वाराणसी) के केंद्र में स्थित है—मणिकर्णिका घाट। जहाँ गंगा के अन्य घाट सुबह की आरती, दीपदान और उत्सवों के लिए जाने जाते हैं, वहीं मणिकर्णिका की पहचान कुछ अलग है। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति किसी सांसारिक सुख या वरदान की लालसा लेकर नहीं आता, बल्कि यहाँ की हवाओं में एक ही प्रार्थना गूंजती है—मोक्ष और परम शांति।
महाश्मशान: जहाँ चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती
मणिकर्णिका घाट को 'महाश्मशान' कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ साल के 365 दिन और चौबीसों घंटे चिताएं जलती रहती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने इस घाट को यह वरदान दिया था कि यहाँ जिसका भी अंतिम संस्कार होगा, उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाएगी। यही कारण है कि यहाँ मृत्यु शोक का विषय नहीं, बल्कि मोक्ष का उत्सव बन जाती है।

क्यों कहते हैं इसे मणिकर्णिका?
इस घाट के नाम के पीछे एक अत्यंत पवित्र कथा है। माना जाता है कि माता सती के आत्मदाह के बाद जब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब यहाँ उनके कान का आभूषण यानी 'मणिकर्णिका' गिर गया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, स्वयं भगवान विष्णु ने यहाँ चक्र-पुष्करिणी कुंड खोदा था और तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव के कान की मणि यहाँ गिर गई थी।
मनोकामना नहीं, सत्य का साक्षात्कार
दुनियाभर के मंदिरों में लोग धन, स्वास्थ्य और सफलता की मन्नतें माँगते हैं, लेकिन मणिकर्णिका घाट पर कदम रखते ही इंसान की सोच बदल जाती है।
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जीवन का परम सत्य: जलती हुई चिताओं के बीच खड़ा व्यक्ति महसूस करता है कि अंत में सब कुछ राख है। यहाँ अहंकार और मोह का अंत होता है।
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शांति की खोज: यहाँ लोग अपने प्रियजनों के लिए 'शांति' और स्वयं के लिए 'वैराग्य' की प्रार्थना करते हैं।
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राम नाम सत्य है: यहाँ की गूँज इंसान को याद दिलाती है कि दुनिया की भागदौड़ व्यर्थ है, केवल ईश्वर का नाम ही सत्य है।
मणिकर्णिका की अनूठी परंपराएं
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मणिकर्णिका कुंड: घाट के पास ही एक पवित्र कुंड है, जहाँ स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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शमशान चैत्र नवरात्र: यहाँ साल में एक बार 'शमशान की होली' और जलती चिताओं के बीच विशेष संगीत उत्सव का आयोजन होता है, जो जीवन और मृत्यु के मिलन का प्रतीक है।
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तारक मंत्र: मान्यता है कि यहाँ प्राण त्यागने वाले के कान में स्वयं महादेव 'तारक मंत्र' फूँकते हैं।
निष्कर्ष: मणिकर्णिका घाट केवल एक श्मशान नहीं है; यह एक ऐसा स्कूल है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। यह हमें बताता है कि जीवन छोटा है और अंत निश्चित है, इसलिए शांति और प्रेम ही एकमात्र मार्ग हैं।
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