गुजरात में ड्रग्स का कोहराम: गली-गली बिक रहा है जहर !

गुजरात में राज्य में 14 लाख से अधिक लोग नशे के जाल में हैं, जहाँ अहमदाबाद के पुनर्वास केंद्रों में हर महीने 600+ युवाओं की भीड़ लग रही है।

गुजरात में ड्रग्स का कोहराम: गली-गली बिक रहा है जहर !

गुजरात में नशे का बढ़ता जाल: सफेद जहर की गिरफ्त में युवा, पुनर्वास केंद्रों पर उमड़ रही भीड़

कभी व्यापार और शांति के लिए पहचाना जाने वाला गुजरात आज एक गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है। राज्य में शराब के बाद अब गलियों-कूचों में गांजा और सिंथेटिक ड्रग्स की बिक्री ने पैर पसार लिए हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अकेले अहमदाबाद के सरकारी और निजी मनोचिकित्सा केंद्रों (Psychiatric Centers) में ड्रग रिहैबिलिटेशन (नशामुक्ति) के लिए हर महीने 600 से अधिक युवाओं की लंबी कतारें लग रही हैं। जानकारों का मानना है कि यह आंकड़ा तो महज एक बानगी है; असल स्थिति इससे कई गुना अधिक भयावह हो सकती है。


युवा पीढ़ी पर मंडराता खतरा

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल और निजी केंद्रों में आने वाले नशा करने वालों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 35 वर्ष के युवाओं की है। डॉक्टरों ने चिंता जताते हुए बताया कि अब 13 से 17 वर्ष तक की कोमल आयु के बच्चे भी नशे के जाल में फंस रहे हैं। जहाँ 40 से अधिक उम्र के लोगों में शराब की लत अधिक है, वहीं युवतियों में भी नशीले पदार्थों का सेवन तेजी से बढ़ रहा है।

सामाजिक प्रतिष्ठा खोने के डर से कई लोग पड़ोसी राज्यों के नशामुक्ति केंद्रों में भी इलाज करवा रहे हैं।


नशे का बदलता स्वरूप: शहर बनाम गांव

नशे का पैटर्न भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग देखा जा रहा है:

  • शहरी क्षेत्र: यहाँ मेफेड्रोन (MD), मेथेटाइन, गांजा और चरस जैसे पाउडर वाले ड्रग्स आसानी से उपलब्ध हैं।

  • ग्रामीण क्षेत्र: यहाँ के युवा सस्ती शराब और कफ सिरप के नशे को महामारी की तरह अपना रहे हैं।

  • उत्तर गुजरात: इस क्षेत्र के युवाओं में अफीम का चलन अधिक देखा गया है।


उच्च शिक्षित और रसूखदार वर्ग भी अछूता नहीं

यह भ्रम टूट रहा है कि उच्च शिक्षा या ऊंचा पद व्यक्ति को नशे से दूर रखता है। निजी नशामुक्ति केंद्रों के डॉक्टरों के अनुसार, उनके यहाँ इलाज के लिए पूर्व और वर्तमान डिप्टी कलेक्टर, डॉक्टर, और शिक्षक जैसे जिम्मेदार नागरिक भी पहुंच रहे हैं। यहाँ तक कि पड़ोसी राज्यों के बड़े नेता और उद्योगपति भी नशे की लत के कारण इन केंद्रों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।


आंकड़ों की जुबानी: भयावह सच

गुजरात विधानसभा में पेश किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, नशे का कारोबार जड़ें जमा चुका है:

  • बरामदगी: पिछले दो वर्षों में राज्य में 3,162 किलो ड्रग्स, चरस, गांजा और अफीम जब्त की गई है。

  • शराब: एक वर्ष के भीतर ही 269 करोड़ रुपये की देसी-विदेशी शराब और बीयर बरामद हुई है。

  • बंधाणी (Addicts): गुजरात में लगभग 14 लाख लोग नशे के आदी हैं, जिनमें 12 लाख पुरुष और 2 लाख महिलाएं शामिल हैं。


सिंधु भवन रोड: नशे का नया केंद्र?

अहमदाबाद का पॉश इलाका कहा जाने वाला सिंधु भवन रोड इन दिनों 'नशा संस्कृति' को लेकर चर्चा में है। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, यहाँ के कैफे और सड़कों पर नशे में धुत युवाओं को आसानी से देखा जा सकता है। हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल की आड़ में चल रहे इस अवैध कारोबार के कारण आम नागरिकों का रात में यहाँ निकलना मुश्किल हो गया है。


नशे का यह बढ़ता प्रभाव न केवल परिवारों को उजाड़ रहा है, बल्कि देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी एक बड़ी बाधा बन रहा है। प्रशासन और समाज को मिलकर इस "सफेद जहर" के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।