महाराष्ट्र सरकार अब बाल विवाह पर डिजिटल और जमीनी स्ट्राइक करने की तैयारी में !
अब शादी के कार्ड पर छपेगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि! बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक बेहद कड़ा और अनोखा कानून लाने पर विचार कर रही है।
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक बेहद अनोखा और कड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में अब शादियों के निमंत्रण पत्र (Wedding Cards) सिर्फ मेहमानों को बुलाने का जरिया नहीं होंगे, बल्कि वे दूल्हा-दुल्हन की उम्र का कानूनी प्रमाण भी बनेंगे।
सरकार एक ऐसे नीतिगत प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत शादी के कार्ड पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि (Date of Birth) छापना अनिवार्य किया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने इस योजना और सरकार के आगामी लक्ष्यों को लेकर एक बड़ी घोषणा की है।
1. प्रस्ताव क्या है और यह कैसे काम करेगा?
अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में उम्र छुपाकर या चोरी-छिपे बाल विवाह करा दिए जाते हैं, जिनकी भनक प्रशासन को नहीं लग पाती। इसी लूपहोल को बंद करने के लिए महाराष्ट्र सरकार यह नया नियम लाने की तैयारी में है:
-
कार्ड प्रिंटिंग पर अनिवार्य नियम: शादी का कार्ड छपवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस वालों को दूल्हा-दुल्हन के प्रामाणिक आयु दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड) देखने होंगे।
-
समाजिक जवाबदेही: कार्ड पर जन्मतिथि छपने से न केवल मेहमानों और समाज को उम्र की जानकारी होगी, बल्कि अवैध बाल विवाहों की पहचान करना और उन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करना बेहद आसान हो जाएगा।
2. लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में दर 10% से नीचे लाना
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस नतीजे हासिल करना है।
-
मिशन मोड पर काम: राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों के भीतर महाराष्ट्र में बाल विवाह की दर को 10% से नीचे लाने का एक कड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
-
सख्त निगरानी: इसके लिए जिला स्तर पर बाल विवाह निषेध अधिकारियों (Child Marriage Prohibition Officers) और ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार और जवाबदेही सौंपी जा रही है।
3. 'राजस्थान मॉडल' का अध्ययन: रणनीति के पीछे की प्रेरणा ?
इस कानून और रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार 'राजस्थान मॉडल' का बारीकी से अध्ययन कर रही है।
-
राजस्थान की मिसाल: राजस्थान में बाल विवाह एक बड़ी चुनौती रहा है, जिससे निपटने के लिए वहां स्थानीय स्तर पर शादी के कार्डों पर आयु प्रमाण और विवाह पंजीकरण को लेकर कड़े नियम और जागरूकता अभियान चलाए गए हैं।
-
महाराष्ट्र में कस्टमाइजेशन: महाराष्ट्र सरकार राजस्थान की इस केस स्टडी के सफल पहलुओं को अपनाकर उसे अपने राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार लागू करेगी।
4. ग्रामीण स्तर पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
नए प्रस्तावों के तहत केवल परिवारों पर ही नहीं, बल्कि शादी से जुड़े अन्य पक्षों पर भी बड़ी जिम्मेदारी आएगी:
-
प्रिंटिंग प्रेस, कैटरर्स और पंडितों पर नजर: यदि किसी विवाह में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस, शादी कराने वाले पंडित/काजी, कैटरर्स और मैरिज हॉल के मालिकों को भी कानूनी दायरे में लाया जा सकता है।
-
ग्राम स्तर पर वेरिफिकेशन: विवाह से पहले स्थानीय प्रशासन या ग्राम सेवक के पास दोनों पक्षों की उम्र का ब्योरा देना अनिवार्य करने पर भी विचार चल रहा है।
शादी के कार्ड पर जन्मतिथि अनिवार्य करने का यह विचार पहली नजर में भले ही साधारण लगे, लेकिन यह बाल विवाह के खिलाफ एक बेहद व्यावहारिक और अचूक हथियार साबित हो सकता है। यह कदम न केवल नाबालिग बच्चियों के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि समाज में एक बड़ी कानूनी और नैतिक चेतना भी पैदा करेगा। यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो सामाजिक सुधार की दिशा में महाराष्ट्र देश के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है।
Matrimonial

BRG News 


