भारत ने मोड़ी रावी की धार, अब क्या करेगा पाक ?

भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) के तहत अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग करते हुए शाहपुर कंडी परियोजना को पूरा किया है। रावी नदी का जो पानी व्यर्थ बहकर पाकिस्तान जा रहा था, अब वह भारत में 32,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 206 मेगावाट बिजली उत्पादन में काम आएगा। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भारत ने मोड़ी रावी की धार, अब क्या करेगा पाक ?

बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! शाहपुर कंडी डैम से भारत का 'रावी' प्रहार

भारत ने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) के तहत अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग करते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। दशकों से लंबित शाहपुर कंडी परियोजना के पूरा होने के साथ ही अब रावी नदी का वह पानी, जो पाकिस्तान की ओर बह जाता था, भारतीय खेतों की प्यास बुझाएगा।

यह सिर्फ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत का एक बड़ा 'स्ट्रैटेजिक मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है। आइए समझते हैं क्या है भारत का यह 'रावी' अटैक और पाकिस्तान पर इसका क्या असर होगा।


क्या है शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट?

पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी बैराज का काम अब पूरा हो चुका है। इस बांध के चालू होने से रावी नदी के पानी का प्रवाह जो पहले पाकिस्तान की ओर चला जाता था, अब पूरी तरह से रुक गया है।

  • स्थान: रावी नदी, पंजाब और जम्मू-कश्मीर बॉर्डर।

  • मकसद: पाकिस्तान जाने वाले अधिशेष पानी को रोककर भारत के कृषि और बिजली क्षेत्र में उपयोग करना।

  • क्षमता: इससे जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की 32,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी।

पाकिस्तान के लिए 'वॉटर स्ट्राइक' क्यों?

1960 की सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत तीन पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलज—पर भारत का पूरा अधिकार है। इसके बावजूद, एक बांध की कमी के कारण रावी का लगभग 1150 क्यूसेक पानी हर साल बिना उपयोग के पाकिस्तान जा रहा था।

"अब भारत ने अपनी नदियों के पानी पर अपने कानूनी अधिकार को लागू कर दिया है। यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आर्थिक और कृषि संबंधी झटका है, क्योंकि वह अपनी सिंचाई के लिए इस पानी पर निर्भर रहता था।"


भारत को मिलने वाले 3 बड़े फायदे

  1. कृषि क्रांति: जम्मू-कश्मीर और पंजाब के किसानों को अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे इस क्षेत्र की पैदावार में भारी बढ़ोतरी होगी।

  2. बिजली उत्पादन: शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट से लगभग 206 मेगावाट पनबिजली (Hydropower) पैदा की जा सकेगी।

  3. रणनीतिक बढ़त: जल कूटनीति (Water Diplomacy) के मामले में भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने संसाधनों का एक-एक कतरा अपने नागरिकों के हित में इस्तेमाल करेगा।


पाकिस्तान की बेचैनी का कारण

पाकिस्तान पहले से ही भीषण जल संकट और आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। रावी नदी के पानी पर भारत के इस 'कंट्रोल' से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सिंचाई व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर शोर मचाने के बावजूद, पाकिस्तान इस मामले में कानूनी रूप से कमजोर है क्योंकि भारत केवल उसी पानी को रोक रहा है जिस पर संधि के अनुसार उसका हक है।

शाहपुर कंडी डैम का निर्माण भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। यह प्रोजेक्ट न केवल सीमावर्ती राज्यों की तस्वीर बदलेगा, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत अब अपनी उदारता की कीमत अपने विकास को रोककर नहीं चुकाएगा।