खाकी से डिजिटल कैमॉफ्लाज तक !
क्या आप जानते हैं कि आजादी के बाद से हमारी सेना की वर्दी में कितने बदलाव आए हैं? ब्रिटिश काल की खाकी से लेकर आज की अत्याधुनिक 'डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म' तक, भारतीय सेना की वर्दी का सफर बेहद दिलचस्प रहा है।
भारतीय सेना की पहली वर्दी का डिज़ाइन
आजादी से पहले ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय सैनिकों की वर्दी का डिज़ाइन मुख्य रूप से ब्रिटिश सेना की तर्ज पर ही था। भारतीय सेना की पहली वर्दी का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन और सैन्य अधिकारियों की एक समिति को जाता है, जिन्होंने भारतीय जलवायु और तत्कालीन परिस्थितियों के अनुकूल इसे तैयार किया था। उस समय की वर्दी में 'खाकी' रंग का उपयोग प्रमुखता से किया गया था, जिसे 1840 के दशक में सर हैरी लम्सडेन द्वारा पेश किया गया था।
आजादी के बाद हुए प्रमुख बदलाव
1947 में आजादी मिलने के बाद भारतीय सेना की वर्दी में समय-समय पर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए, जिनका मुख्य उद्देश्य भारतीय सैन्य पहचान को स्थापित करना और युद्ध के आधुनिक स्वरूप के अनुरूप ढलना था:
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चिह्न और प्रतीक: स्वतंत्रता के बाद, वर्दी पर लगे औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर भारतीय पहचान वाले प्रतीकों (जैसे अशोक स्तंभ और राष्ट्रीय ध्वज के रंग) को स्थान दिया गया।
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रंग और पैटर्न का विकास: शुरुआती दशकों में पारंपरिक खाकी का प्रभुत्व रहा, लेकिन समय के साथ 'जंगल पैटर्न' (Jungle Pattern) और 'डिजिटल कैमॉफ्लाज' (Digital Camouflage) को अपनाया गया, ताकि युद्ध के दौरान सैनिक प्राकृतिक परिवेश में आसानी से घुल-मिल सकें।
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आधुनिक कॉम्बैट यूनिफॉर्म (2022): हाल के वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव 2022 में आया, जब भारतीय सेना ने नई 'डिजिटल पैटर्न' वाली कॉम्बैट यूनिफॉर्म पेश की। इसे अधिक आरामदायक, टिकाऊ और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों (जैसे रेगिस्तान, जंगल और पहाड़ी क्षेत्र) में छिपने की क्षमता (Camouflage) को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
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फैब्रिक और तकनीक: पुरानी वर्दी के भारी सूती कपड़ों की जगह अब हल्की, जल्दी सूखने वाली और मजबूत सिंथेटिक फैब्रिक का उपयोग किया जाता है, जो सैनिकों के लिए कठिन अभियानों में अधिक सुविधाजनक है।
आजादी के बाद से भारतीय सेना की वर्दी केवल एक पोशाक नहीं, बल्कि देश की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता और आधुनिकता का प्रतीक रही है। आज की वर्दी न केवल रक्षा और सुरक्षा के मानकों को पूरा करती है, बल्कि यह सैनिकों को चुनौतीपूर्ण वातावरण में बेहतर प्रदर्शन करने में भी मदद करती है।
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