हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त; निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए दिए कड़े निर्देश

अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मीडिया को सोशल मीडिया ट्रायल और बयानों के पीछे न भागने की सख्त हिदायत दी है। साथ ही, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केस की कमान अब सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई है।

हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त; निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए दिए कड़े निर्देश

अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया ट्रायल को लेकर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं।

प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने साफ कहा है कि मीडिया को इस संवेदनशील मामले में संयम बरतना चाहिए और कानून को बिना किसी बाहरी प्रभाव के अपना काम करने देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • मीडिया संयम बरते: कोर्ट ने निर्देश दिया कि मीडिया पीड़ितों और गवाहों के बयानों के पीछे न भागे। कानूनी प्रक्रिया को तय नियमों के हिसाब से ही आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।

  • बयानबाजी के बजाय जांच एजेंसी को बताएं: सीजेआई ने दोनों पक्षों (पीड़ित और आरोपी परिवार) को हिदायत दी कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयानबाजी करने के बजाय अपने बयान और पक्ष सीधे जांच एजेंसी के सामने दर्ज कराएं।

  • निष्पक्ष जांच जरूरी: कोर्ट ने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। किसी भी तरह का नरेटिव (विमर्श) बनाकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता का बयान: सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सूचित किया कि अब इस मामले की जांच CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) अपने हाथ में लेगी। उन्होंने बेहद भावुक टिप्पणी करते हुए कहा, "एक माता-पिता के लिए अपनी बेटी का तलाकशुदा होना, उसके मृत होने से कहीं बेहतर है।"

क्या है पूरा मामला और केस टाइमलाइन?

नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के एक वकील समर्थ सिंह से हुई थी। समर्थ की मां गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त जिला जज (Retired District Judge) हैं। इस मामले का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:

  • 12 मई, 2026: भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।

  • 13 मई, 2026: पहला पोस्टमार्टम हुआ, जिसमें शुरुआती तौर पर फांसी लगाने की बात कही गई। हालांकि, परिवार ने ट्विशा के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान होने का दावा किया।

  • 15 मई, 2026: पुलिस ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला (FIR) दर्ज किया।

  • 22 मई, 2026: फरार चल रहे आरोपी पति समर्थ सिंह को जबलपुर से पुलिस कस्टडी में लिया गया।

  • 23-24 मई, 2026: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर AIIMS दिल्ली के डॉक्टरों की विशेष टीम ने भोपाल पहुंचकर शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Second Autopsy) किया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके बाद ही ट्विशा का अंतिम संस्कार हुआ।

विवाद और सुप्रीम कोर्ट के दखल की वजह

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब ट्विशा के परिवार ने स्थानीय पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। चूंकि आरोपी की मां खुद पूर्व जज हैं, इसलिए पीड़ित परिवार ने संस्थागत पक्षपात (Institutional Bias) और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गंभीर आशंका जताई थी।

इसी बीच सोशल मीडिया और मुख्यधारा के मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस केस को लेकर समानांतर ट्रायल (Media Trial) शुरू हो गया था। इसी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को खुद संज्ञान लेकर दखल देना पड़ा, ताकि न्याय की प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, पारदर्शी और बिना किसी बाहरी दबाव के आगे बढ़ सके।