वो 5 ईरान के 'दोस्त' कौन ? जिनके लिए खोला गया होर्मुज, भारत भी लिस्ट में शामिल !

ईरान-इजरायल तनाव के बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को भारत सहित अपने 5 मित्र देशों के लिए खुला रखा है, ताकि वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति बाधित न हो।

वो 5 ईरान के 'दोस्त' कौन ?  जिनके लिए खोला गया होर्मुज, भारत भी लिस्ट में शामिल !

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की आंशिक नाकाबंदी के बीच एक बड़ी खबर आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह रणनीतिक मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि उसने अपने 5 'खास दोस्तों' के लिए इसे खुला रखा है। इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।


ईरान के वो 5 'दोस्त' कौन हैं?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरानी स्टेट टीवी पर दिए एक बयान में उन देशों के नाम सार्वजनिक किए, जिन्हें होर्मुज के रास्ते सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) दिया गया है। ये देश हैं:

  1. भारत (India)

  2. चीन (China)

  3. रूस (Russia)

  4. पाकिस्तान (Pakistan)

  5. इराक (Iraq)

इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में बांग्लादेश, थाईलैंड और तुर्की के जहाजों को भी समन्वय के बाद अनुमति मिलने का जिक्र है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की 'ऊर्जा लाइफलाइन' है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक बाजारों में तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया था।

भारत के लिए बड़ी राहत

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। हाल ही में भारत के दो LPG टैंकर (Pine Gas और Jag Vasant) सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं। भारत ने 2018 के बाद पहली बार ईरान से LPG की खेप भी खरीदी है, जिसे इस कूटनीतिक तालमेल का परिणाम माना जा रहा है।


किनके लिए बंद है रास्ता?

ईरानी विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यह क्षेत्र फिलहाल एक 'वॉर ज़ोन' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निम्नलिखित के लिए रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा:

  • अमेरिका और इजरायल के जहाज।

  • वे देश जो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल हैं।

  • दुश्मन देशों के सहयोगी जहाजों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।


UN की अपील का असर

यह फैसला संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज के बंद रहने से खेती-किसानी के सीजन में उर्वरकों और ईंधन की सप्लाई रुक रही है, जिससे आम जनता को भारी नुकसान हो रहा है।


 कूटनीति की जीत

ईरान का यह कदम दिखाता है कि युद्ध की स्थिति में भी वह अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है। भारत के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे देश में ईंधन की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा।